नकली ऐप के शिकंजे में फंसे सैंकड़ों WhatsApp यूज़र्स, साइबर अटैक से बचने के लिए जान लें कैसे पहचानें असली-नकली

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दुनिया के सबसे पॉपुलर इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक WhatsApp ने हाल ही में एक बड़े साइबर खतरे को लेकर अपने यूज़र्स को चेतावनी दी है। कंपनी ने एक फर्जी WhatsApp ऐप के जरिए फैलाए जा रहे स्पाइवेयर अटैक का पता लगाया है, जिसमें सैकड़ों यूज़र्स को निशाना बनाया गया। TechCrunch की रिपोर्ट के अनुसार, 200 से ज्यादा यूज़र्स को धोखे से एक नकली WhatsApp ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया गया, जिसमें खतरनाक सॉफ्टवेयर छिपा हुआ था।

WhatsApp ने तुरंत लिया एक्शन

कंपनी के अनुसार, इस साइबर हमले से प्रभावित ज्यादातर यूज़र्स इटली में पाए गए हैं। WhatsApp ने इस मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए प्रभावित यूज़र्स को लॉग आउट कर दिया और उन्हें संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp ने इस हमले के पीछे इटली की स्पाइवेयर कंपनी SIO का हाथ होने का आरोप लगाया है। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है और इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए औपचारिक नोटिस भेजेगी।

फिलहाल कंपनी का मुख्य ध्यान उन यूज़र्स की सुरक्षा पर है, जिन्होंने अनजाने में इस फर्जी ऐप को डाउनलोड कर लिया है। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है। पहले भी कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि फर्जी ऐप्स के जरिए निगरानी और डेटा चोरी की घटनाएं आम होती जा रही हैं। यूज़र्स को धोखे से ऐसे ऐप्स इंस्टॉल कराए जाते हैं, जो उनकी निजी जानकारी तक पहुंच बना लेते हैं।

WhatsApp यूज़र्स इन बातों का रखें ध्यान

WhatsApp अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद महत्वपूर्ण है। जैसे:

  • यूज़र्स को हमेशा Google Play Store या Apple App Store जैसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही ऐप डाउनलोड करना चाहिए।
  • SMS, ईमेल या मैसेज के जरिए आए लिंक से ऐप इंस्टॉल करने से बचना चाहिए।
  • ऐप इंस्टॉल करने से पहले डेवलपर का नाम जरूर जांचें, जैसे WhatsApp के लिए Meta Platforms होना चाहिए।
  • किसी भी अनऑफिशियल या मॉडिफाइड ऐप का इस्तेमाल न करें, क्योंकि उनमें स्पाइवेयर होने की संभावना रहती है।
  • अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें, भले ही वह किसी परिचित व्यक्ति की ओर से क्यों न आया हो।
  • समय-समय पर ऐप परमिशन की जांच करना भी आपकी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।

नकली ऐप को कैसे पहचानें?

  1. ऐप का नाम ध्यान से देखें: स्कैमर्स अक्सर छोटे-मोटे बदलावों के साथ असली डेवलपर की नकल करने की कोशिश करते हैं, जैसे “Netflix” की जगह “Netflx” लिख देना।
  2. डाउनलोड नंबर्स चेक करें: पॉपुलर ऐप्स के लाखों डाउनलोड्स होते हैं, जबकि नकली वर्ज़न के नंबर उससे बेहद कम होते हैं.
  3. सोच-समझकर परमिशन दें: अगर एक साधारण ऐप जैसे फ़्लैशलाइट या वॉलपेपर ऐप आपके कॉन्टैक्ट्स, SMS या माइक्रोफोन का एक्सेस मांगता है, तो यह मैलिशियस हो सकता है.
  4. खराब क्वालिटी: फ़र्ज़ी ऐप्स में अक्सर स्पेलिंग की गलती, कम रेज़ोल्यूशन वाला आइकन या खराब तरीके से लिखे गए डिस्क्रिप्शन होते हैं.
  5. संदिग्ध रिव्यूज़: बहुत सारे या एक जैसे लगने वाले कई सारे संदिग्ध 5 स्टार रिव्यूज़ पर ध्यान दें. साथ ही 1-स्टार रिव्यूज़ को भी देखें ताकि क्रैश या मैलीशियस होने का पता चल सके.
  6. ऐप पब्लिशिंग की तारिख देखें: एक नया रिलीज़ हुआ ऐप, जो सुव्यवस्थित होने का दावा करता है, खतरे की घंटी हो सकता है.
Faiza

फाईज़ा परवीन डिजिट हिंदी में एक कॉपी एडिटर हैं। वह 2023 से डिजिट में काम कर रही हैं और इससे पहले वह 6 महीने डिजिट में फ्रीलांसर जर्नलिस्ट के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, और उनके पसंदीदा तकनीकी विषयों में स्मार्टफोन, टेलिकॉम और ओटीटी शामिल हैं। उन्हें हमारे हिंदी पाठकों को वेब पर किसी डिवाइस या सेवा का उपयोग करने का तरीका सीखने में मदद करने के लिए लेख लिखने में आनंद आता है। सोशल मीडिया की दीवानी फाईज़ा को अक्सर अपने छोटे वीडियो की लत के कारण स्क्रॉलिंग करते हुए देखा जाता है। वह थ्रिलर फ्लिक्स देखना भी काफी पसंद करती हैं।

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