हाल ही में संसद के सत्र के दौरान टेलीकॉम नियमों को लेकर एक अहम बहस हुई, जिसमें मोबाइल डेटा के इस्तेमाल और उसकी वैधता पर गंभीर सवाल उठाए गए. अभी भारत में जो भी डेटा यूजर्स अपने रोज के प्लान में नहीं खर्च कर पाते, वह दिन खत्म होते ही एक्सपायर हो जाता है. इसी मुद्दे को लेकर अब लोगों की मांग तेज हो गई है कि बचा हुआ डेटा अगले दिन के लिए कैरी फॉरवर्ड किया जाए.
यह मुद्दा सिर्फ सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह उपभोक्ता अधिकार और टेलीकॉम कंपनियों की जिम्मेदारी से भी जुड़ गया है. यूजर्स का कहना है कि जब वे डेटा के लिए पैसे दे रहे हैं, तो उन्हें उसका पूरा फायदा मिलना चाहिए.
भारत की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां जैसे Bharti Airtel, Reliance Jio और Vodafone Idea अपने प्रीपेड प्लान्स में रोजाना 1.5GB, 2GB या 3GB डेटा देती हैं. ये प्लान सस्ते और लोकप्रिय जरूर हैं, लेकिन इनमें एक बड़ी कमी है. अगर यूजर पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं करता, तो बचा हुआ डेटा रात 12 बजे के बाद अपने आप खत्म हो जाता है. न तो उसका कोई रिफंड मिलता है और न ही उसे अगले दिन इस्तेमाल किया जा सकता है.
मान लीजिए किसी यूजर को रोज 2GB डेटा मिलता है, लेकिन वह सिर्फ 1.5GB ही इस्तेमाल करता है. ऐसे में बचा हुआ 0.5GB डेटा पूरी तरह बेकार हो जाता है. इसी मुद्दे को लेकर संसद में Raghav Chadha ने सवाल उठाया और डेटा रोलओवर की मांग रखी. उनका तर्क साफ था कि लोग उस चीज के लिए पैसे दे रहे हैं जिसका वे पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, तो यह सिस्टम कहीं न कहीं अनुचित लगता है.
इस बहस के दौरान यूजर्स की तरफ से कुछ बड़ी मांगें भी सामने आईं, जो आने वाले समय में टेलीकॉम सेक्टर को बदल सकती हैं.
पहली मांग यह है कि बचा हुआ डेटा अगले दिन में जोड़ दिया जाए, ताकि यूजर उसे बाद में इस्तेमाल कर सके. फिलहाल यह सुविधा कुछ पोस्टपेड प्लान्स में मिलती है, लेकिन प्रीपेड यूजर्स इससे वंचित हैं.
दूसरी मांग यह है कि अगर कोई यूजर लगातार कम डेटा इस्तेमाल कर रहा है, तो उसके प्लान की कीमत उसी हिसाब से कम की जाए या उसे पर्सनलाइज्ड प्लान दिया जाए. इससे बिलिंग ज्यादा न्यायसंगत हो सकती है.
तीसरी मांग डेटा शेयरिंग की है. यानी अगर किसी यूजर के पास डेटा बच रहा है, तो वह उसे अपने परिवार या दोस्तों के साथ शेयर कर सके. इसे एक तरह से डिजिटल करेंसी की तरह इस्तेमाल करने की बात कही गई है.
अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो मोबाइल डेटा प्लान पहले से ज्यादा यूजर-फ्रेंडली हो सकते हैं. इससे न सिर्फ डेटा की बर्बादी कम होगी, बल्कि डिजिटल सेवाओं में पारदर्शिता और भरोसा भी बढ़ेगा.
हालांकि अभी तक टेलीकॉम कंपनियों की तरफ से इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, लेकिन यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ रहा है. साफ है कि यूजर्स अब उस डेटा को खोना नहीं चाहते जिसके लिए वे पैसे दे रहे हैं. वे एक ऐसा सिस्टम चाहते हैं जो उन्हें पूरा फायदा दे और सही मायने में न्यायसंगत हो.
यह भी पढ़ें: Android फोन खतरे में! नया मैलवेयर बना रहा टारगेट, ऐसे रहें सावधान