क्या सरकार मोबाइल कंपनियों से सोर्स कोड मांग रही है? PIB Fact Check ने लगा दी ये वाली मोहर..देखें क्या है माजरा

यह समझना जरूरी है कि स्मार्टफोन का सोर्स कोड आखिर होता क्या है। सोर्स कोड किसी भी मोबाइल डिवाइस का डिजिटल ब्लूप्रिंट होता है। यही वह मूल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और निर्देशों का सेट होता है, जो फोन के प्रोसेसर, मेमोरी, सेंसर और हार्डवेयर फीचर्स को नियंत्रित करता है।

Fact Check ने साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इससे पहले एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार स्मार्टफोनभारत में स्मार्टफोन सिक्योरिटी को लेकर हाल ही में उठे एक बड़े विवाद पर अब पूरी तरह से विराम लग गया है। स्मार्टफोन कंपनियों के सोर्स कोड को लेकर फैली खबरों को सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेकिंग एजेंसी PIB निर्माताओं से उनके डिवाइस का सोर्स कोड शेयर करने को कह सकती है, रिपोर्ट में ऐसा भी कहा था कि जल्द ही इसे लेकर स्मार्टफोन कंपनियों को अल्टिमेटम दिया जा सकता है। यह खबर सामने आते ही टेक इंडस्ट्री में हलचल मच गई थी।

क्या कहता है PIB Fact Check

हालांकि अब PIB Fact Check ने इस पूरे दावे को गलत और भ्रामक बताया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और न ही किसी स्मार्टफोन कंपनी से उनके डिवाइस का सोर्स कोड या कोई सीक्रेट कोडिंग शेयर करने के लिए कहा गया है। PIB ने यह भी बताया कि इस तरह की खबरें पूरी तरह गलतफहमी पर आधारित थीं।

कैसे शुरू हुआ ये मामला?

दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि भारत सरकार मोबाइल डिवाइस की सुरक्षा को लेकर बड़े सुधार करने जा रही है और इसके तहत कंपनियों से सोर्स कोड मांगा जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी हिंट दिया गया कि इस कदम का मकसद ग्लोबल टेक कंपनियों पर नियामकीय दबाव बढ़ाना हो सकता है। इस दावे ने तुरंत ही चिंता बढ़ा दी, क्योंकि सोर्स कोड किसी भी स्मार्टफोन कंपनी की सबसे संवेदनशील और गोपनीय जानकारी होती है।

क्या होता है सोर्स/सीक्रेट कोड?

यह समझना जरूरी है कि स्मार्टफोन का सोर्स कोड आखिर होता क्या है। सोर्स कोड किसी भी मोबाइल डिवाइस का डिजिटल ब्लूप्रिंट होता है। यही वह मूल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और निर्देशों का सेट होता है, जो फोन के प्रोसेसर, मेमोरी, सेंसर और हार्डवेयर फीचर्स को नियंत्रित करता है। आसान शब्दों में कहें तो यही कोड तय करता है कि आपका स्मार्टफोन कैसे काम करेगा, कितना सुरक्षित रहेगा और डेटा को कैसे संभालेगा।

क्या इतना जरूरी है सोर्स कोड?

Apple, Samsung और अन्य बड़ी कंपनियां अपने ऑपरेटिंग सिस्टम के ऊपर अलग-अलग प्रोपाइटरी लेयर्स जोड़ती हैं, जिससे उनका यूज़र इंटरफेस और सिक्योरिटी सिस्टम बाकी कंपनियों से अलग बनता है। यही वजह है कि सोर्स कोड को बेहद गोपनीय माना जाता है और कंपनियां इसे किसी बाहरी एजेंसी के साथ साझा नहीं करतीं। इस कोड में डिवाइस की पूरी सुरक्षा संरचना छिपी होती है, जिसे साझा करना साइबर सिक्योरिटी के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।

अब सवाल उठता है कि फिर यह पूरा विवाद पैदा क्यों हुआ? PIB Fact Check के मुताबिक, Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) की ओर से हाल ही में कुछ स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन की योजना बनाई गई थी। इन बैठकों का उद्देश्य मोबाइल डिवाइस की सेफ्टी और सिक्योरिटी से जुड़े नियमों को बेहतर बनाना था। ये पूरी तरह रूटीन और सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं, ताकि आने वाले समय में यूज़र्स की डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।

PIB ने साफ किया है कि इन चर्चाओं को गलत तरीके से सोर्स कोड शेयरिंग से जोड़ दिया गया। एजेंसी ने यह भी दोहराया कि अभी तक कोई आखिरी नियम या रेगुलेशन तय नहीं किया गया है। सरकार किसी भी नए फ्रेमवर्क को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगी और उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।

क्या कहता है PIB का आधिकारिक बयान!

अपने आधिकारिक बयान में PIB Fact Check ने कहा, “कोई लैस रेगुलेशन तैयार नहीं किया गया है और भविष्य में बनने वाला कोई भी फ्रेमवर्क उचित परामर्श के बाद ही लागू किया जाएगा।” इस बयान के बाद साफ हो गया है कि स्मार्टफोन कंपनियों को अपने सोर्स कोड साझा करने की खबरें पूरी तरह अफवाह थीं। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी जैसे संवेदनशील विषयों पर आधी-अधूरी जानकारी कितनी तेजी से भ्रम फैला सकती है। सरकार और कंपनियों दोनों के लिए यूज़र डेटा की सुरक्षा प्राथमिकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कंपनियों की सबसे गोपनीय तकनीक को सार्वजनिक किया जाएगा। PIB Fact Check की सफाई के बाद अब इस पूरे विवाद पर विराम लग चुका है।

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Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life.

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