Realme set to become an Oppo subbrand
स्मार्टफोन इंडस्ट्री से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने Realme यूजर्स को सोचने पर मजबूर कर दिया है। चीनी स्मार्टफोन ब्रांड Realme को अब आधिकारिक तौर पर Oppo की सब-ब्रांड के तौर पर शामिल किया जा रहा है। यह फैसला दोनों कंपनियों की पैरेंट कंपनी BBK Electronics की ओर से किया गया है। इस कदम का मकसद खर्चों में कटौती करना और संसाधनों को एक साथ इस्तेमाल करना बताया जा रहा है।
भारत समेत कई देशों में Realme के स्मार्टफोन काफी लोकप्रिय हैं, ऐसे में यह खबर सामने आते ही यूजर्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या अब Realme के फोन्स बाजार में मिलना बंद हो जाने वाले हैं, इसके अलावा यह भी एक बड़ा सवाल है कि भविष्य में Realme Phones का क्या होने वाला है? यह सवाल जायज भी है, हालांकि आने वाले समय में इसका जवाब मिल जाने वाला ही है।
असल में, अभी तक मिल रही जानकारी के अनुसार, Realme के स्मार्टफोन पहले की तरह ही लॉन्च होते रहेंगे और वे Realme ब्रांड नाम से ही सेल होने वाले हैं। फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब Realme एक स्वतंत्र ब्रांड न होकर Oppo की सब-ब्रांड के तौर ऑपरेट करने वाला है। ठीक वैसे ही जैसे Vivo की सब-ब्रांड iQOO या Nothing की सब-ब्रांड CMF काम करती है। यानी Realme के फोन, टैबलेट और ऑडियो प्रोडक्ट्स पर नाम वही रहेगा, लेकिन बैकएंड में ऑपरेशन Oppo के साथ मिलकर किए जाएंगे। अभी के लिए यह इसका जवाब है, अब देखना होगा कि आखिर भविष्य में क्या होता है!
इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह कॉस्ट कटिंग बताई जा रही है। Realme ने भारत में ही अपना पहला स्मार्टफोन लॉन्च किया था और बजट व मिड-रेंज सेगमेंट में इस ब्रांड की मजबूत पकड़ रही है। लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मार्जिन प्रेशर के चलते कंपनियां अब रिसोर्स शेयरिंग की ओर बढ़ रही हैं। Oppo की सब-ब्रांड बनने से दोनों कंपनियां R&D, सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग जैसी चीजों में एक-दूसरे की मदद करने वाली हैं।
इस बदलाव का असर मार्केट पर भी साफ दिख सकता है। ITC की 2025 की तीसरी तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में Oppo दूसरी सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी थी, जबकि Vivo पहले और Samsung तीसरे नंबर पर थी। Realme की बात करें तो यह खिसक कर छठे स्थान पर पहुँच चुकी है, लेकिन अब Oppo–Realme मिलकर इस नंबर को बदल सकते हैं, इसके अलावा अन्य ब्रांडस के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं। खासतौर पर यह सैमसंग और विवो के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
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