भारत में दस्तक देने के लिए Starlink तैयार! इस राज्य के साथ हुआ अहम समझौता, आसमान से सीधे मिलेगा इंटरनेट

HIGHLIGHTS

मेघालय में Starlink इंटरनेट की शुरुआत की तैयारी

सैटेलाइट इंटरनेट से दूरदराज इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ेगी

भारत में Starlink रोलआउट से पहले कुछ मंजूरियां बाकी हैं

Elon Musk की सैटेलाइट कंपनी Starlink देश में जल्द दस्तक देने के लिए तैयार है. भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. मेघालय सरकार ने Starlink India के साथ समझौता किया है. जिससे राज्य के दूरदराज और कठिन इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की योजना है. आइए आपको बताते हैं कि Starlink के आने से क्या बदल जाएगा और दूसरी सारी जानकारी.

मेघालय में क्या बदलने वाला है?

Starlink की सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी उन जगहों तक पहुंचेगी जहां अब तक नेटवर्क काफी कमजोर या लगभग न के बराबर रहा है. मेघालय की भौगोलिक स्थिति, जैसे पहाड़ी इलाके और घने जंगल, हमेशा से नेटवर्क के लिए चुनौती रहे हैं. ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट इस समस्या का सीधा समाधान बन सकता है. इस प्रोजेक्ट के तहत पहले पायलट बेसिस पर सेवा शुरू की जाएगी, जिससे यह समझा जा सके कि यह टेक्नोलॉजी ग्राउंड लेवल पर कितनी असरदार है.

इन सेक्टर को मिलेगा फायदा

इस पहल का असर सिर्फ इंटरनेट स्पीड तक सीमित नहीं रहेगा. सीधी बात यह है कि जहां नेटवर्क नहीं था, वहां अब डिजिटल एक्सेस मिल सकता है.

  • शिक्षा में ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल क्लासेस बेहतर होंगी.
  • हेल्थकेयर में दूर बैठे डॉक्टरों से कनेक्ट होना आसान होगा.
  • आपदा प्रबंधन और सुरक्षा में रियल-टाइम कम्युनिकेशन मजबूत होगा.

Starlink को Indian National Space Authorisation and Promotion Centre से ऑपरेशन की मंजूरी मिल चुकी है. यह लाइसेंस 5 साल के लिए वैध रहेगा और कंपनी को भारत में अपनी सैटेलाइट नेटवर्क क्षमता इस्तेमाल करने की अनुमति देता है. कंपनी पहले मुंबई में डेमो रन भी कर चुकी है और बेंगलुरु में अपने ऑफिस के लिए हायरिंग भी शुरू कर चुकी है.

अभी क्या बाकी है?

हालांकि, सब कुछ तय नहीं हुआ है. अभी भी कुछ अहम चीजें बाकी हैं. Telecom Regulatory Authority of India को सैटेलाइट इंटरनेट की स्पेक्ट्रम कीमत तय करनी है. Department of Telecommunications को स्पेक्ट्रम अलोकेशन करना है. जब तक ये दोनों क्लियर नहीं होते, तब तक पूरे देश में कमर्शियल रोलआउट शुरू नहीं होगा.

संभावित कीमत

पिछले साल Starlink की वेबसाइट पर एक प्लान दिखा था जिसमें 8,600 रुपये महीना और 34,000 रुपये हार्डवेयर लागत बताई गई थी. लेकिन कंपनी ने साफ किया कि ये असली कीमत नहीं थी, बल्कि टेस्ट डेटा था जो गलती से दिख गया था. असली प्लान्स का ऐलान फाइनल अप्रूवल के बाद ही होगा.

फिलहाल अगर यह कदम सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा. अगर मेघालय में यह मॉडल सफल होता है, तो इसे दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है. सीधा मतलब यह है कि भारत में इंटरनेट का अगला बड़ा बदलाव फाइबर या टावर नहीं, बल्कि सैटेलाइट से आ सकता है.

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Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं.

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