देशभर में फैले नेशनल हाईवे भले ही सड़क कनेक्टिविटी के मामले में मजबूत हों, लेकिन डिजिटल कनेक्टिविटी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी को लेकर National Highways Authority of India (NHAI) ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को NHAI ने साफ कहा कि उसने मोबाइल नेटवर्क की खराब स्थिति को लेकर Department of Telecommunications (DoT) और Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) से जल्द ही इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
NHAI की ओर से की गई एक जांच में सामने आया है कि देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर 424 ऐसे स्थान हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क या तो बेहद कमजोर है या पूरी तरह गायब है। ये इलाके करीब 1,750 किलोमीटर लंबे हाईवे सेक्शन में फैले हुए हैं, जिनमें कई ग्रीनफील्ड और दूरदराज़ के हिस्से शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि इन जगहों पर नेटवर्क की गैर-मौजूदगी सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है।
NHAI के मुताबिक, नेशनल हाईवे अक्सर ग्रामीण और रिमोट इलाकों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में अगर इन रास्तों पर मोबाइल नेटवर्क नहीं हो, तो इमरजेंसी सेवाओं, एक्सीडेंट रिस्पॉन्स और टेक्नोलॉजी आधारित सरकारी सेवाओं पर सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि NHAI ने DoT और TRAI से टेलीकॉम कंपनियों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि इन इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी सुधारी जा सके।
इसके साथ ही NHAI ने एक और अहम सुझाव भी दिया है। एजेंसी चाहती है कि दुर्घटना-संभावित इलाकों में सफर करने वाले लोगों को प्रोएक्टिव SMS या फ्लैश SMS अलर्ट भेजे जाएं। इनमें खास तौर पर वे सड़कें शामिल हैं, जहां आवारा मवेशियों की आवाजाही ज्यादा रहती है या पहले कई हादसे हो चुके हैं। ऐसे अलर्ट ड्राइवरों को पहले से सतर्क कर सकते हैं और हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
NHAI का कहना है कि उसने ऐसे सभी संवेदनशील और एक्सीडेंट-प्रोन हाईवे सेक्शन्स की लिस्ट TRAI के साथ शेयर कर दी है। इसका साफ मकसद है, नेशनल हाईवे सिर्फ कंक्रीट और डामर से जुड़े न रहें, बल्कि डिजिटल रूप से भी मजबूत और सुरक्षित बनें।