India AI Impact Summit 2026 इस साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े सबसे बड़े वैश्विक आयोजनों में से एक माना जा रहा है. अब सामने आई जानकारी के अनुसार, इस आयोजन ने न सिर्फ नीतिगत स्तर पर प्रभाव डाला, बल्कि व्यावसायिक तौर पर भी बड़ा रिटर्न दिया है.
एक आरटीआई जवाब के मुताबिक, इस समिट के साथ आयोजित India AI Impact Expo 2026 ने करीब 67 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया. यह एक्सपो 16 से 21 फरवरी के बीच आयोजित किया गया था, जिसमें कंपनियों, स्टार्टअप्स और संस्थानों ने एआई आधारित प्रोडक्ट और सेवाओं का प्रदर्शन किया.
Software Technology Parks of India ने आरटीआई के जवाब में बताया कि यह पूरा राजस्व एग्जिबिशन स्पेस की बिक्री से आया. एक्सपो इस समिट का एक अहम हिस्सा था, जहां इंडस्ट्री और टेक सेक्टर के विभिन्न खिलाड़ी एक मंच पर आए.
एक्सपो में स्टॉल आवंटन “Expression of Interest” प्रक्रिया के जरिए किया गया था. इसमें “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर जगह दी गई, जो उपलब्धता और वेन्यू के लेआउट प्लान पर निर्भर थी. संस्थानों को दिए गए स्पेस की विस्तृत जानकारी पहले से ही इवेंट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है और इसके अलावा कोई अलग डेटा संकलित नहीं किया गया.
इस एक्सपो का उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना था, जहां प्रतिभागी अपने एआई इनोवेशन, सेवाएं और तकनीक को प्रदर्शित कर सकें. साथ ही, यह आयोजन उद्योग और उपयोगकर्ताओं के बीच संवाद और जागरूकता बढ़ाने के लिए भी बनाया गया था.
यह समिट भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को भी दर्शाता है, खासकर एआई नीति और तकनीकी दिशा तय करने में. बड़ी संख्या में भागीदारी और एक्सपो से हुए राजस्व यह संकेत देते हैं कि देश में एआई को लेकर व्यावसायिक और रणनीतिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है.
नई दिल्ली में आयोजित इस समिट में 91 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने एक साझा घोषणा को अपनाया. इस बार फोकस पहले के “रिस्क आधारित” दृष्टिकोण से हटकर “इम्पैक्ट”, “विश्वास” और “मानव-केंद्रित एआई” पर रखा गया. इस बदलाव ने विभिन्न देशों के बीच सहमति बनाने में मदद की.
समिट के दौरान कई महत्वपूर्ण नीतिगत ढांचे भी सामने आए. इनमें स्किल डेवलपमेंट और वर्कफोर्स ट्रांजिशन के लिए दिशानिर्देश, Trusted AI Commons जैसी पहल और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े फ्रेमवर्क शामिल थे.
इसके अलावा, सतत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, जलवायु से जुड़े पहलू और डेटा गवर्नेंस में जवाबदेही आधारित दृष्टिकोण पर भी चर्चा हुई. इस पूरे एजेंडा में समावेशन को केंद्र में रखा गया, जिससे एआई तक समान पहुंच और वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके.
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