Elon Musk Starlink Satellite
PM Narendra Modi के विकसित Bharat@2047 विजन को ज़मीनी स्तर तक उतारने की दिशा में गुजरात सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। राज्य में डिजिटल गवर्नेंस और कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के लिए गुजरात सरकार ने Elon Musk की Starlink के साथ साझेदारी की है, ऐसा भी कह सकते हैं कि LoI साइन किया है। यह पहल खासतौर पर गुजरात के ग्रामीण, आदिवासी और दूरदराज़ इलाकों में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचाने के लिए हुई एक डील है, इसका मतलब है कि अब उन इलाकों तक भी इंटरनेट पहुँच पाने वाला है, जहां अब तक टेलीकॉम सुविधाएं सीमित हैं।
मुख्यमंत्री Bhupendra Patel के नेतृत्व में हुए इस समझौते के तहत, SpaceX की सब्सिडियरी Starlink Satellite Communications Pvt Ltd राज्य में डिजिटल कनेक्टिविटी मिशन को आगे बढ़ाएगी। LoI के अनुसार, सैटेलाइट आधारित ब्रॉडबैंड सेवाओं के ज़रिए उन क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा जहां फाइबर या मोबाइल नेटवर्क पहुंचना अब तक मुश्किल रहा है।
इस समझौते के पहले चरण में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, जिसमें कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC), सरकारी स्कूल, ई-गवर्नेंस सुविधाएं, जिला आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष, पोर्ट्स और वन्यजीव पार्क्स को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि नर्मदा, दाहोद जैसे आकांक्षी जिलों और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इस पहल से डिजिटल इन्क्लूजन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्टिविटी के ज़रिए पुलिस आउटपोस्ट्स, डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर्स, वन्यजीव निगरानी इकाइयों और कृषि अनुसंधान केंद्रों को स्थिर और भरोसेमंद नेटवर्क मिलेगा। इससे न सिर्फ सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत होगी, बल्कि सरकारी सेवाओं की डिलीवरी भी अधिक तेज़ और प्रभावी बन सकेगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इस समझौते का सीधा असर देखने को मिलेगा। सरकारी स्कूलों में डिजिटल लर्निंग के लिए स्मार्ट कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में टेली-मेडिसिन और रिमोट हेल्थ सर्विसेज़ को गति मिलेगी। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।
लॉन्च टाइमलाइन को लेकर भी संकेत मिलने लगे हैं। Starlink भारत में अपने ऑपरेशंस को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें नए ऑफिस खोलना और कुछ राज्य सरकारों के साथ संभावित साझेदारियों पर काम करना शामिल है। इन सभी तैयारियों को देखते हुए माना जा रहा है कि Starlink सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस भारत में 2026 की दूसरी तिमाही की शुरुआत तक ऑपरेशनल हो सकती है। हालांकि, इसकी आधिकारिक तारीख अभी सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में Starlink सैटेलाइट इंटरनेट की स्पीड 25 Mbps से लेकर 225 Mbps तक हो सकती है। यह स्पीड शहरी इलाकों में मिलने वाले फाइबर इंटरनेट जितनी नहीं होने वाली है, लेकिन इस सेवा को उन जगहों के लिए वरदान माना जा रहा है, जहां आज तक भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्शन नहीं पहुंचा है। खास बात यह है कि भारत सरकार ने घरेलू टेलीकॉम कंपनियों के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए Starlink के कनेक्शनों की संख्या पर एक सीमा तय की है। मौजूदा जानकारी के अनुसार, Starlink भारत में ज्यादा से ज्यादा केवल 20 लाख यूज़र्स को ही कनेक्शन दे सकेगा। इसका मतलब है कि ऐसा हो सकता है कि चरण दर चरण तरीके से इस सेवा को देश में लाया जाए।
कीमत की बात करें तो Starlink भारत में एक प्रीमियम सर्विस के तौर पर एंट्री कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके लिए यूज़र्स को एक बार के सेट-अप कॉस्ट के तौर पर करीब 30,000 से 35,000 रुपये तक देना पड़ सकता है, जिसमें सैटेलाइट डिश और जरूरी हार्डवेयर शामिल होगा। इसके अलावा, मासिक प्लान की कीमत 3,000 रुपये से लेकर 8,000 रुपये के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। यह कीमत आम ब्रॉडबैंड कनेक्शन से ज्यादा जरूर है, लेकिन जिन इलाकों में कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है, वहां Starlink एक अहम समाधान बन सकता है।
अंत में, Starlink का भारत में आना सिर्फ एक नई इंटरनेट सर्विस की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि यह डिजिटल कनेक्टिविटी के लिहाज़ से एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। खासकर उन इलाकों में, जहां आज भी इंटरनेट एक लग्ज़री जैसा है, वहां Starlink शिक्षा, हेल्थकेयर और डिजिटल सेवाओं की पहुंच को पूरी तरह बदल सकता है। अब देखना यह होगा कि कीमत, रेगुलेशन और ग्राउंड-लेवल डिप्लॉयमेंट के बाद यह सर्विस भारतीय यूज़र्स की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।