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1 फ़रवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 पेश किया और इस बार सरकार ने AI (Artificial Intelligence) को सिर्फ एक तकनीकी शब्द के तौर पर नहीं देखा, बल्कि एक गवर्नेंस टूल के रूप में उसकी भूमिका को रेखांकित किया है। सरकार का मानना है कि अब AI केवल भविष्य की टेक्नोलॉजी नहीं रहा, बल्कि देश के प्रशासनिक ढांचे, नागरिक सेवा सुधार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बनने वाला है। यही वजह है कि बजट में AI Governance जैसे शब्द को प्राथमिकता दी गई है, जो यह बताता है कि AI के उपयोग में ज्ञान, नियंत्रण, पारदर्शिता और भरोसे को भी उतना ही महत्व मिलेगा जितना उसके तकनीकी फायदे को।
कुछ सालों में AI बेहद तेजी से हमारी लाइफ का हिस्सा बन गया है, अस्पतालों से लेकर स्कूल, सरकारी पोर्टल्स से लेकर बड़े बिज़नेस तक AI का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन जैसे-जैसे इसके इस्तेमाल की रफ़्तार बढ़ी, कुछ बड़े सवाल भी सामने आए!
Budget 2026 इन सवालों को मानता है और यह स्पष्ट करता है कि AI के उपयोग पर सिर्फ तकनीकी पकड़ नहीं, बल्कि नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही की भी ज़रूरत है। यही कारण है कि बजट दस्तावेज़ में AI Governance Framework पर जो चर्चा है, वह सिर्फ buzzwords नहीं, बल्कि एक दिशा और नियंत्रण नीति की शुरुआत है।
Budget 2026 संकेत देता है कि आने वाले सालों में AI का इस्तेमाल सिर्फ IT सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। इसके उपयोग के कई बड़े क्षेत्र सामने आए हैं।
लेकिन हर एरिया में यह भी देखा जाएगा कि AI सिस्टम सरल, समझने योग्य और जवाबदेह हैं, ताकि निर्णय पर सवाल उठे तो उसका जवाब साफ दिया जा सके।
Budget 2026 यह साफ कर देता है कि भारत AI के क्षेत्र में पीछे नहीं रहना चाहता, पर अन्धाधुंध रफ़्तार भी नहीं चाहता। सरकार एक ऐसे AI लाभकारी तकनीकी रूप से मजबूत, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और आम जनता के भरोसे के काबिल इकोसिस्टम की दिशा में काम कर रही है।
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