बिना इंटरनेट और नेटवर्क के लोग भेज रहे मैसेज, जैक डोर्सी के इस ऐप ने ईरान और युगांडा में मचाई धूम, ऐसे करता है काम

Updated on 26-Jan-2026

जरा सोचिए, आपके शहर में इंटरनेट बंद हो जाए. न व्हाट्सएप चले, न सिग्नल और न ही कोई ईमेल. ऐसे में आप अपनों से संपर्क कैसे करेंगे? यह कोई काल्पनिक स्थिति नहीं है, बल्कि ईरान और युगांडा जैसे देशों में लोग इसका सामना कर रहे हैं. लेकिन अब इसका तोड़ मिल गया है. ट्विटर (Twitter) के पूर्व को-फाउंडर Jack Dorsey ने एक ऐसा ‘जादुई’ ऐप बनाया है जो बिना इंटरनेट और बिना सिम नेटवर्क के भी आपके मैसेज दूसरों तक पहुँचा सकता है.

बिना नंबर और ईमेल के चलता है यह ऐप

इस ऐप का नाम है Bitchat. इसकी लोकप्रियता अचानक तब बढ़ गई जब ईरान और युगांडा में विरोध प्रदर्शनों के दौरान सरकारों ने इंटरनेट बंद कर दिया. ऐसे समय में लोग इस ऐप की मदद से एक-दूसरे से जुड़े रहे. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए आपको न तो फोन नंबर की जरूरत है और न ही ईमेल आईडी की. यह पूरी तरह से गोपनीयता (privacy) का ध्यान रखता है.

ब्लूटूथ से बनता है ‘इंसानी नेटवर्क’

अब आप सोच रहे होंगे कि बिना इंटरनेट के यह काम कैसे करता है?

ब्लूटूथ मेश (Mesh) तकनीक: यह ऐप आपके फोन के ब्लूटूथ का इस्तेमाल करता है.

चेन सिस्टम: मान लीजिए आपको अपने दोस्त को मैसेज भेजना है जो दूर है. आपका मैसेज आपके पास वाले किसी और व्यक्ति के फोन पर जाएगा, फिर वहां से दूसरे के पास, और ऐसे ही ‘हॉप’ (hop) करते हुए वह आपके दोस्त तक पहुँच जाएगा.

रेंज: सामान्य तौर पर ब्लूटूथ 300 मीटर तक काम करता है, लेकिन इस ‘मेश नेटवर्क’ की वजह से यह रेंज बहुत बढ़ जाती है. हर फोन एक ‘टावर’ की तरह काम करता है.

प्राइवेसी और सुरक्षा

बाकी मैसेजिंग ऐप्स (जैसे WhatsApp) के मुकाबले यह बिल्कुल अलग है.

  • सेंट्रल सर्वर नहीं: इसका कोई मालिक या सेंट्रल ऑफिस नहीं है जहाँ आपका डेटा स्टोर हो.
  • गायब होने वाले मैसेज: मैसेज सिर्फ आपके फोन में स्टोर होते हैं और डिफ़ॉल्ट रूप से गायब हो जाते हैं.
  • ओपन सोर्स: यह एक फ्री और ओपन-सोर्स ऐप है, यानी कोई भी डेवलपर इसकी सुरक्षा की जांच कर सकता है.

विरोध प्रदर्शनों में बना हथियार

यह ऐप उन जगहों के लिए वरदान साबित हो रहा है जहाँ भीड़ ज्यादा होती है या नेटवर्क जाम हो जाता है. युगांडा में चुनाव के दौरान और ईरान में प्रदर्शनों के बीच इसके डाउनलोड्स में चार गुना बढ़ोतरी देखी गई. यह वैसा ही है जैसे 2019 में हांगकांग के प्रदर्शनों में Bridgefy ऐप का इस्तेमाल हुआ था.

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Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं.

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