साउथ सिनेमा की एक दमदार क्राइम-थ्रिलर फिल्म है जिसकी IMDb रेटिंग 8.4 दर्ज की गई है और जो नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है। इस फिल्म की खास बात यह है कि विशाल भारद्वाज और अनुराग कश्यप जैसे चर्चित फिल्मकारों ने भी इसकी खुलकर सराहना की है। इस फिल्म का नाम ‘Visaaranai’ है।
यह फिल्म एक ऑटो-रिक्शा चलाने वाले एम. चंद्रकुमार, जिन्हें ऑटो चंद्रन के नाम से भी जाना जाता है, के उपन्यास ‘Lock Up’ से प्रेरित है। कहानी 1983 की है, जब आंध्र प्रदेश के गुंटूर में चंद्रकुमार और उनके साथियों को पुलिस द्वारा अमानवीय टॉर्चर का सामना करना पड़ा था। फिल्म उसी सच्ची घटना को बेहद कड़वे और रियलिस्टिक अंदाज़ में पर्दे पर उतारती है।
फिल्म में पुलिस की क्रूरता, सिस्टम में फैला भ्रष्टाचार और राजनीति से जुड़ी अंदरूनी मिलीभगत को बिना किसी सजावट के दिखाया गया है। यह दर्शाती है कि किस तरह आम और निर्दोष लोग व्यवस्था की जटिल भूलभुलैया में फंसकर आसानी से ‘बलि का बकरा’ बना दिए जाते हैं।
‘Visaaranai’ को नेशनल लेवल पर भी बड़ी पहचान मिली है। इस फिल्म ने तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए, जिनमें बेस्ट तमिल फीचर फिल्म, बेस्ट एडिटिंग और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर शामिल हैं। इसके अलावा, इसे Amnesty International Italia Award 2015 से भी सम्मानित किया गया।
दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में अभिनेता धनुष इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले थे, लेकिन उस समय वे अपने बॉलीवुड प्रोजेक्ट्स में व्यस्त थे, जिस वजह से यह संभव नहीं हो सका। बावजूद इसके, धनुष ने पूरी स्क्रिप्ट सुने बिना ही इस प्रोजेक्ट को अपने प्रोडक्शन हाउस Wonderbar Productions के तहत प्रोड्यूस करने का निर्णय ले लिया था।
धनुष के फिल्म से बाहर होने के बाद, लीड रोल दिनेश, समुथिरकानी और किशोर ने निभाए। तीनों कलाकारों ने अपने किरदारों में ऐसी जान डाल दी है कि दर्शक उनके दर्द, डर और लाचारी को गहराई से महसूस करता है।
यह फिल्म पूरी तरह से मसाला एंटरटेनमेंट से अलग है। यहां न तो चमक-दमक है और न ही हल्का-फुल्का मनोरंजन। ‘Visaaranai’ आपको भीतर तक हिला देती है और समाज व व्यवस्था के उस स्याह सच से रूबरू कराती है, जिस पर अक्सर बात नहीं की जाती।