Samsung ने अभी हाल ही में लॉन्च किए अपने साल के पहले फ्लैगशिप Samsung Galaxy S26 Ultra में इस साल का सबसे चर्चित फीचर यानि Privacy Display सपोर्ट दिया है। इस फीचर के कारण ही यह फोन इस साल लॉन्च होने वाले किसी भी फोन से अलग और सबसे बेहतरीन माना जा रहा है। असल में, अभी तक सभी लोग दुनिया भर में स्क्रीन की सुरक्षा के लिए एक साधारण प्राइवेसी स्क्रीन प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करते थे। इसकी कीमत 500 रुपये से 1000 रुपये के बीच हो सकती है। हालांकि, कुछ जगह यह सस्ते में मिल सकता है। अब जैसे ही Samsung ने Samsung Galaxy S26 Ultra को लॉन्च किया तो इस प्राइवेसी डिस्प्ले की चर्चा हर जगह होने लगी और यह भी चर्चा होने लगी की क्या इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए इतने महंगे फोन की जरूर है भी, जब यह काम एक सस्ते में आने वाला स्क्रीन प्रोटेक्टर ही कर सकता है। असल में, इस तकनीकी को किसी भी तरह से हल्के में नहीं किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार, आपको बताते चलते हैं कि यह कोई सॉफ्टवेयर ट्रिक नहीं जो सैमसंग ने लागू की है, बल्कि हार्डवेयर-लेवल टेक्नोलॉजी है जो स्क्रीन के पिक्सल्स से निकलने वाली रोशनी के फैलने को कंट्रोल करती है। आइए अब इन दोनों ही के बीच तुलना देखते हैं तो जानते हैं। आखिर मसला क्या है?
सबसे बड़ा सवाल अब यह उठता है कि क्या यह फीचर पारंपरिक Privacy Screen Protector को रिप्लेस कर सकता है? यहाँ हम इसी सवाल के जवाब को तलाशने का प्रयास करने वाले हैं।
अगर तुलना को देखा जाए तो अभी हमारे पास फोन मौजूद नहीं है, लेकिन लॉन्च पर मौजूद हमारे प्रतिनिधि ने फोन की डिस्प्ले को इस्तेमाल किया और हमारे साथ जानकारी को शेयर किया है, उसी आधार पर हम इस तुलना को करने वाले हैं। असल में, एक फोन पर एक नॉर्मल स्क्रीन प्रोटेक्टर को लगाया गया (यह पहले से ही फोन पर मौजूद था) और Galaxy S26 Ultra को इसके साथ रखा गया तो जो अंतर सामने आया वो हम आपको बताने वाले हैं।
हमने पाया है कि स्क्रीन प्रोटेक्टर साइड एंगल से कंटेंट छिपाने में ज्यादा प्रभावी नजर आ रहा है। अगर कोई बगल से झांकने की कोशिश करे, तो प्रोटेक्टर स्क्रीन को लगभग ब्लैक कर देता है। लेकिन इसके साथ साथ इसमें कुछ कमियाँ भी देखने को मिलती हैं। आइए Privacy Screen Protector की कमियों पर नजर डालते हैं।
Samsung Galaxy S26 Ultra में मौजूद Privacy Display इसलिए भी सबसे ज्यादा खास और यूनीक हैं क्योंकि यह सॉफ्टवेयर से कंट्रोल होती है। आइए जानते है कि इसका क्या मतलब है और यह कैसे काम करती है, या कर सकती है।
यह हार्डवेयर-लेवल टेक्नोलॉजी है, इसलिए यह न तो पुराने Samsung फोन्स में लाई जा सकती है, और न ही यह लेटेस्ट Samsung Galaxy S26 या Samsung Galaxy S26 Plus में मौजूद है।
फिलहाल यह फीचर Samsung Galaxy S26 Ultra में ही एक्सक्लूसिव तौर पर रखी गई है। हालांकि, अन्य बहुत से एंड्रॉयड ब्रांड भी इस तकनीकी पर काम कर रहे हैं, लेकिन ऐसा हो सकता है कि इस साल के अंत तक यह तकनीकी किसी स्मार्टफोन ब्रांड में देखने को मिले?
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