इस समय खाड़ी देशों में चल रही टेंशन के बारे में कौन नहीं जानते हैं। सभी इस बारे में इस समय जानते हैं कि ईरान के साथ अमेरिका और इस्राइल का युद्ध लगभग लगभग शुरू हो चुका है। दोनों ओर से बमबारी चल रही है, बहुत से लोगों की जान गई है और बहुत से लोग घायल भी हुए हैं। हालांकि, जैसे ही ईरान के सुप्रीमो Ayatollah Ali Khamenei की मौत की खबर आई वो समय सभी के लिए बड़ा ही चौंकाने वाला था, यह खबर 28 फरवरी की सुबह करीब 8:10 बजे (स्थानीय समयानुसार) आई। इसी समय तेहरान में ईरान के सर्वोच्च नेता के आधिकारिक आवास और दफ्तर परिसर Beit Rahbari (हाउस ऑफ लीडरशिप) पर इजरायली लड़ाकू विमानों ने हमला किया। इस हमले में ईरान का सूप्रीमो मारा गया। हालांकि, इसके बाद सवाल खड़ा हुआ है कि आखिर कैसे यह पता चला कि वह कहाँ था। किस तकनीकी का इस्तेमाल इसके लिए किया गया। हम आज आपको इसी तकनीकी के बारे में बताने वाले हैं, जिससे यह जानकारी मिली कि आखिर ईरानी सुप्रीमो उस समय कहाँ था। इसी तकनीकी से उसकी असल लोकेशन को ट्रेक किया गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म पर इस बात के हिंट दिए थे कि काफी लंबे समय से खुफिया एजेंसियां इस ट्रैकिंग में लगी हुई थी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसी Central Intelligence Agency (CIA) ने महीनों तक ख़ामेनेई की लोकेशन और मूवमेंट पैटर्न की जांच की थी। इस बिहेवियरल एनालिसिस से उनकी संभावित दिनचर्या और उपस्थिति वाले स्थानों पर हाई फिडेलिटी आकलन संभव हुआ।
सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी ऐसा कहती है कि हमले के कुछ घंटे यानि शुरुआती कुछ घंटों पहले ही टॉप ईरानी अधिकारियों की एक बैठक उसी परिसर में चली, जिसमें सुप्रीम लीडर की मौजूदगी की पुष्टि थी। इस जानकारी को विंडो ऑफ ऑपर्च्युनिटी माना गया। इसके अलावा इसी जानकारी के आधार पर CIA ने कथित तौर पर यह जानकारी इंटेलिजेंस इजरायल को शेयर कर दी, जिसके बाद हमले का समय रात से बदलकर दिन में कर दिया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल भी अपने लेवल पर महीनों से ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा था। यह स्ट्राइक केवल एक टारगेटेड ऑपरेशन नहीं, बल्कि एक व्यापक अभियान की शुरुआत का संकेत भी माना जा रहा है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ऑपरेशन में Claude नामक एआई टूल का इस्तेमाल हुआ, जिसे Anthropic ने विकसित किया है। बताया गया कि कुछ सैन्य मुख्यालय जिनमें मध्य-पूर्व में अमेरिकी सेंट्रल कमांड भी शामिल है, इंटेलिजेंस आंकलन, टारगेट की पहचान करना और युद्ध सिमुलेशन के लिए इस टूल का उपयोग करते हैं। हालांकि, इसे लेकर अभी के लिए कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
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