हर साल 5 सितंबर को जब पूरा देश शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) मनाता है, तो हम अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। लेकिन साल 2026 का यह शिक्षक दिवस पिछले दशकों की तुलना में बिल्कुल अलग मुकाम पर खड़ा नजर आ रहा है। चॉक, डस्टर और ब्लैकबोर्ड से शुरू हुआ शिक्षा का सफर आज जेनरेटिव एआई (GenAI), कंप्यूटर-विजन और कस्टमाइज्ड एआई एजेंट्स दौर में आगे बढ़ रहा है। जब एक स्टूडेंट अपनी स्क्रीन पर एक प्रॉम्प्ट मात्र लिखकर किसी भी जटिल से जटिल गणितीय सवाल का हल मिनटों में प्राप्त कर सकता है, अब जब कोडिंग और अन्य सभी कुछ खासकर निबंध आदि लिखने का काम एआई खुद से कर रहा है तो जाहिर तौर पर यह सवाल उठना लाज़मी है कि इस एआई युग में शिक्षा और शिक्षण का स्वरूप कैसे बदल रहा है? इसके साथ साथ क्या आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानी शिक्षकों की जगह लेने वाला है?
आज हम इसी बारे में जानने का प्रयास करने वाले हैं कि आज के इस तकनीकी युग में किस तरह क्लासरूम और गुरु-शिष्य की परंपरा एक नई ही दिशा में जा रही है।
हम सभी ने यह देखा और आज तक देखते आ रहे है कि एक पारंपरिक क्लासरूम में एक शिक्षक के सामने 40 से 50 बच्चे बैठते थे और आज भी बैठ रहे हैं, लेकिन आज कुछ बदल जरूर रहा है। एक समय था जब शिक्षक सबको एक ही स्पीड से और एक ही चीज को बढ़ाते थे, चाहे वह किसी को 5 मिनट में ही समझ आ जाए या किसी को इसे समझने में 5 दिन का समय लगे, जब तक किसी भी छात्र को यह चीज समझ में नहीं आती थी, तब तक शिक्षक उसे बताते रहते थे। हालांकि, इस समय AI के आने से बदलाव तो दिख रहा है। इस समय अगर कोई भी छात्र किसी भी विषय में अटकता है तो वह रात के किसी भी समय एआई से सवाल पूछता है तो उसे उसका जवाब झट से मिल जाता है।
AI के आने से एक अन्य फायदा यह हुआ है कि शिक्षक अब क्लर्क नहीं, बल्कि मेंटॉर बन रहे हैं। असल में, ऐसा देखा गया है कि शिक्षकों का 40 से 50 प्रतिशत समय पढ़ाने के बजाय गैर-शैक्षणिक कामों में खर्च होता था। इसे कहीं न कहीं AI ने कं कर दिया है। असल में, इस काम की जिम्मेदारी अब AI ने ले ली है। आधुनिक एआई टूल्स अब टेस्ट पेपर्स का मूल्यांकन कुछ ही मिनटों में कर देते हैं और यह भी बता देते हैं कि क्लास के किस बच्चे को किस टॉपिक में सबसे ज्यादा परेशानी आ रही है। अब जब डेटा एंट्री और प्रशासनिक काम एआई संभाल रहा है तो शिक्षकों को समय मिल रहा है कि वह स्टूडेंट्स को ज्यादा करीब से समझें।
AI के आने से अब शिक्षक केवल Knowledge Provider नहीं रहे हैं, शिक्षक अब फैसिलिटेटर और क्यूरेटर बन रहे हैं।
हालांकि, AI के आने से केवल फायदे ही नहीं हो रहे हैं। इससे कुछ चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं। आइए इनपर भी एक नजर डालते हैं।
तकनीक जितनी सहूलियत लेकर आती है, उसके आसपास की समस्याएं भी इसे जुड़ी हैं। असल में, इस समय किसी भी असाइनमेंट का पूरा जवाब एक क्लिक मिल जा रहा है, ऐसे में छात्रों में खुद सोचने, शोध करने और दिमाग पर जोर डालने की क्षमता लगभग लगभग खत्म होती जा रही है, शायद इसी कारण New York में स्कूल आदि में AI पर बैन लगाया जा रहा है। इसे देखकर ऐसा भी कहा जा सकता है कि जहां एक ओर तकनीकी हमारी मदद कर रही है, दूसरी ओर यही तकनीकी हमारी कमर में कभी भी चाकू भोंक सकती है।
एक रोबोट या एल्गोरिदम किसी छात्र को पाइथागोरस प्रमेय का रटा लगाना तो सिखा सकता है, लेकिन जब कोई बच्चा असफल होकर रोता है, तो उसके कंधे पर हाथ रखकर यह कहने की ताकत सिर्फ एक शिक्षक में होती है कि ‘कोई बात नहीं, फिर से ट्राई करो, हो जाएगा।’
एआई युग में शिक्षकों को तकनीक से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि तकनीक को अपना सबसे भरोसेमंद हथियार बनाने की जरूरत है। भविष्य में वह शिक्षक पीछे नहीं छूटेगा जो इंसानों को पढ़ाता है, बल्कि वह शिक्षक पीछे छूट जाएगा जो एआई का सही इस्तेमाल करने से कतराता है।
सच्चा शिक्षण केवल दिमाग में तथ्य भरना नहीं, बल्कि आत्मा को रोशन करना है। और जब तक इंसानियत जिंदा है, एक शिक्षक की जगह दुनिया का कोई भी सुपरकंप्यूटर या AGI कभी नहीं ले सकता। शिक्षक दिवस के इस मौके पर, उन सभी मार्गदर्शकों को नमन जो टेक्नोलॉजी की आंधी में भी नई पीढ़ी को सिर्फ ‘स्मार्ट’ नहीं, बल्कि एक ‘संवेदनशील इंसान’ बना रहे हैं!