भारत में कब मिलेगा Starlink का इंटरनेट? इन दो वजहों से अटका मामला, जान लीजिए देरी की वजह

पिछले करीब छह महीनों से भारत में Starlink के लॉन्च को लेकर लगातार खबरें, लीक और अफवाहें सामने आ रही हैं. कंपनी देश में ऑफिस खोल रही है, कर्मचारियों की भर्ती कर रही है और तैयारियों के संकेत भी दिख रहे हैं. लेकिन अब तक कोई ऐसी ठोस आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है जिससे यह साफ कहा जा सके कि सेवाएं अगले महीने, अगले क्वार्टर या 2026 की पहली छमाही में शुरू हो जाएंगी. ऐसे में अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आखिर देरी क्यों हो रही है, तो यहां पूरी तस्वीर समझिए.

Starlink भारत में भर्ती कर रहा है और ऑफिस भी स्थापित कर चुका है, जिससे साफ है कि कंपनी लॉन्च की दिशा में आगे बढ़ रही है. लेकिन केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लेना काफी नहीं है. भारत सरकार की ओर से कुछ जरूरी मंजूरियां और शर्तें पूरी करना अनिवार्य है.

Jyotiraditya Scindia ने स्पष्ट किया है कि Starlink को भारत में सेवाएं शुरू करने से पहले कई सुरक्षा मंजूरियां हासिल करनी होंगी. उन्होंने कहा कि भारत का मौजूदा सुरक्षा ढांचा सभी ऑपरेटरों पर समान रूप से लागू होता है. उनके अनुसार, सरकार के पास सुरक्षा नियमों की एक तय रूपरेखा है और जो भी ऑपरेटर उन नियमों का पालन करेगा, उसे देश में काम करने की अनुमति दी जाएगी.

मौजूदा स्थिति की बात करें तो Starlink के साथ-साथ Jio Satellite Global और Eutelsat OneWeb को भी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने का लाइसेंस मिल चुका है. लेकिन इन तीनों में से किसी को भी अभी तक कमर्शियल सेवाएं शुरू करने के लिए अंतिम सुरक्षा मंजूरी नहीं मिली है.

लॉन्च से पहले इन दो शर्तों को पूरा करना जरूरी

  • पहला, सरकार को सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत तय करनी होगी और उसे संबंधित कंपनी को आवंटित करना होगा.
  • दूसरा, कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह भारत के सभी सुरक्षा नियमों और नियामकीय शर्तों का पूरी तरह पालन कर रही है.

जब तक ये दोनों शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक Starlink या कोई भी अन्य सैटेलाइट इंटरनेट प्रदाता अपनी कमर्शियल सेवाएं शुरू नहीं कर सकता.

मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार स्पेक्ट्रम की कीमत तय करने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की कोशिश कर रही है. उनका उद्देश्य है कि स्पेक्ट्रम आवंटन में देरी न हो और कंपनियों द्वारा सभी अनुपालन शर्तें पूरी करते ही सेवाएं शुरू की जा सकें.

बॉटम लाइन

साफ शब्दों में कहें तो Starlink का भारत में लॉन्च अब केवल तैयारी का मामला नहीं है, बल्कि नियामकीय और सुरक्षा मंजूरियों का विषय है. लाइसेंस मिल चुका है, इरादा भी स्पष्ट है, लेकिन जब तक स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक आधिकारिक तौर पर सेवा शुरू नहीं होगी. अगर दोनों शर्तें समय पर पूरी हो जाती हैं, तो Elon Musk की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भारत में जल्द देखने को मिल सकती है.

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Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं.

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