क्या आपकी बातें सुन रहा है Smart TV? जानिए क्या करता है ये रिकॉर्ड? पुलिस ने भी चेताया, जानें कैसे करें बंद

Updated on 21-Nov-2025

Smart TV अब सिर्फ मनोरंजन का सेंटर नहीं रह गया है. यह हमारे घरों में मौजूद सबसे बड़े डेटा-कलेक्शन डिवाइस में बदल चुका है. लोग फिल्मों, खेल, वेब सीरीज और खबरों का मजा लेते हैं, लेकिन कई बार उन्हें पता भी नहीं चलता कि टीवी उनके देखने की आदतों के साथ-साथ बातचीत और आस-पास के माहौल की जानकारी भी रिकॉर्ड कर रहा है.

यही कारण है कि अब यह सवाल पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या आपका स्मार्ट टीवी चुपचाप आपकी बातें सुन रहा है? स्मार्ट टीवी बनाने वाली कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने टीवी के अंदर माइक्रोफोन, वॉइस असिस्टेंट और ट्रैकिंग सिस्टम इंस्टॉल करती हैं. इन फीचरों का उद्देश्य यह दिखाया जाता है कि टीवी आपकी आवाज पहचान सके और आपकी पसंद के हिसाब से कंटेंट सुझा सके. लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन्हीं फीचरों के जरिये टीवी आपके घर के वातावरण और बातचीत से जुड़ी जानकारी तक पहुंच जाता है.

क्या सच में स्मार्ट टीवी आपकी बातें सुनता है?

अगर आपका टीवी वॉइस असिस्टेंट, वॉइस कमांड या हमेशा तैयार रहने वाले माइक्रोफोन के साथ आता है, तो हां, वह आपकी बातें सुन सकता है. ये माइक सिर्फ तब सक्रिय नहीं होते जब आप “ओके टीवी” या “हैलो” जैसा कोई कमांड देते हैं, बल्कि बैकग्राउंड में भी आवाज़ें पकड़ सकते हैं. कई कंपनियां इन ऑडियो सैंपल को अपने सर्वर पर भेजती हैं ताकि वॉइस रिकग्निशन में सुधार किया जा सके.

इसके साथ ही टीवी आपके देखने की आदतें, चैनल हिस्ट्री, ऐप इस्तेमाल, लोकेशन, आईपी एड्रेस और डिवाइस आईडी जैसी जानकारी भी इकट्ठा करता है. इन डाटा को बाद में विज्ञापनदाताओं, एनालिटिक्स कंपनियों और डेटा ब्रोकर को बेच दिया जाता है.

ACR सबसे बड़ा खतरा क्यों है?

ACR यानी Automatic Content Recognition एक ऐसी तकनीक है जो स्क्रीन पर चल रही हर चीज़ को स्कैन करती है. चाहे आप OTT ऐप चला रहे हों, केबल पर चैनल देख रहे हों, यूट्यूब चला रहे हों या पेन ड्राइव लगा रहे हों, ACR हर फ्रेम को पहचान सकता है और कंपनी की डेटाबेस से मैच कर सकता है.

ACR आपके टीवी का आईपी एड्रेस और लोकेशन भी कैप्चर कर सकता है, जिससे कंपनियों को पता चल जाता है कि आप कौन सा कंटेंट कब और कहां देख रहे हैं. इसको लेकर जम्मू कश्मीर पुलिस ने भी चेतावनी दी है.

टीवी निर्माता कंपनियां दावा करती हैं कि ये डेटा उनके सिस्टम को बेहतर बनाने और आपको पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन देने के लिए लिया जाता है, लेकिन असल में इसका इस्तेमाल टारगेटेड विज्ञापन और प्रोफाइलिंग करने में भी होता है. एक ही कंपनी आपके टीवी डेटा को आपके मोबाइल और लैपटॉप की गतिविधियों से जोड़कर आपका पूरा डिजिटल प्रोफाइल तैयार कर सकती है.

कैसे बचाएं अपनी प्राइवेसी?

  • अगर आप चाहते हैं कि आपका स्मार्ट टीवी आपकी बातें न सुने या ट्रैकिंग कम करे, तो इन सेटिंग्स पर ध्यान दें:
  • टीवी में वॉइस कंट्रोल और वॉइस असिस्टेंट बंद कर दें
  • ACR और पर्सनलाइजेशन फीचर को ऑफ कर दें
  • अगर संभव हो तो टीवी को वाई-फाई से डिस्कनेक्ट रखें
  • राउटर में टीवी के लिए अलग गेस्ट नेटवर्क बना लें
  • कैमरा या माइक्रोफोन को फिजिकली कवर करें
  • समय-समय पर प्राइवेसी सेटिंग चेक करें
  • टीवी का सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहें

स्मार्ट टीवी आधुनिक सुविधाएं देता है, लेकिन साथ ही प्राइवेसी का गंभीर जोखिम भी पैदा करता है. थोड़ी सी सावधानी रखकर आप अपने डेटा और बातचीत को सुरक्षित रख सकते हैं.

यह भी पढ़ें: iPhone 18 का इंतजार कर रहे लोगों को झटका! अगले साल नहीं होगा लॉन्च, जानें कंपनी की नई रणनीति, रिपोर्ट में खुलासा

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं.

Connect On :