साइबर फ्रॉडियों की अब खैर नहीं..फर्जी बैंक अकाउंट्स पर नकेल कसेगा RBI का MuleHunter! ये रही इसकी डिटेल्स

देश में तेजी से बढ़ते साइबर फ्रॉड कहीं ना कहीं डिजिटल बैंकिंग को लेकर चिंता बढ़ाते ही जा रहे हैं। ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल ट्रांजैक्शन के साथ ठगी के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी नोट की जा रही है। हालांकि, समय समय पर सरकार कुछ ना कुछ लेकर आती है जिससे ग्राहकों को राहत मिल सके। इस चुनौती से पार पाने के लिए भी एक नया उपाय सामने आ रहा है। हालांकि, इस उपाय को AI के तौर पर सामने लाया जा रहा है। इस समय देश में सरकार और बैंकिंग सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रहे हैं, ताकि सामने आ रही किसी भी समस्या को इसी के जरिए हल किया जा सके।

इसी दिशा में MuleHunter.ai नाम का एक खास AI टूल इस समय बेहद ज्यादा चर्चा में बना हुआ है, जिसे देश के केंद्रीय बैंक Reserve Bank of India ने विकसित कराया है। इस सिस्टम का उद्देश्य साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट (Mule Accounts) की पहचान करना है, इसके अलावा अगर इसे इस तरह का कोई बैंक अकाउंट मिलता है तो उसे बंद करना भी इसी का काम है। आइए इसके बारे में डिटेल्स देखते हैं कि आखिर यह कैसे एक आम आदमी के लिए फायदेमंद हो सकता है और कैसे यह साइबर फ्रॉडियों पर नकेल कसने वाला है।

क्या है MuleHunter.ai?

MuleHunter.ai एक एडवांस AI आधारित बैंकिंग सुरक्षा सॉफ्टवेयर है। इसे Reserve Bank Innovation Hub के जरिए दिसंबर 2024 में पेश किया गया था। इसके बाद से ही या चर्चा में बना हुआ है। हालांकि, आजकल इसकी चर्चा फिर से होने लगी है। इसका मुख्य काम ऐसे बैंक खातों की पहचान करना है जिन्हें अपराधी मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर फ्रॉड या अवैध ट्रांजैक्शन के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है। कई मामलों में ये खाते फर्जी दस्तावेजों से खोले जाते हैं या किसी व्यक्ति के नाम पर अपराधी उनका इस्तेमाल कर रहे होते हैं।

म्यूल अकाउंट क्या होते हैं?

म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग अपराधी गैरकानूनी लेन-देन के लिए करते हैं। कैसे काम करता है म्यूल अकाउंट का नेटवर्क…

असल में, ठगी के पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं, पैसे को जल्दी निकालकर गायब कर दिया जाता है, ट्रांजैक्शन का असली सोर्स छिपा कर रखा जाता है आदि आदि। इसी कारण ऐसे खातों की पहचान करना साइबर अपराध से लड़ने में बेहद जरूरी माना जाता है।

सरकार क्यों चाहती है इसका इस्तेमाल करना?

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने बैंकों से इस AI टूल को बड़े स्तर पर अपनाने की अपील की है। शुरुआत में MuleHunter.ai को सीमित बैंकों के साथ टेस्ट किया गया था। लेकिन अब सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा बैंक इसे अपने सिस्टम में शामिल करें।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह AI सिस्टम हर महीने हजारों संदिग्ध बैंक खातों की पहचान करने में सक्षम रहा है। अगर इसे पूरे बैंकिंग सिस्टम में लागू किया जाता है तो साइबर ठगी के मामलों में काफी कमी आ सकती है।

MuleHunter.ai कैसे करता है काम?

यह AI सिस्टम बड़े डेटा सेट्स और मशीन लर्निंग मॉडल के जरिए काम करता है। यह बैंक खातों की गतिविधियों का गहराई से विश्लेषण करता है, जैसे:

  • ट्रांजैक्शन पैटर्न
  • पैसे के आने-जाने की स्पीड
  • कोई भी असामान्य व्यवहार
  • संदिग्ध फंड ट्रांसफर

अगर किसी खाते में म्यूल अकाउंट जैसी गतिविधि दिखती है, तो सिस्टम उसे तुरंत फ्लैग या चिन्हित कर देता है। इसके बाद बैंक जांच करके समय रहते कार्रवाई कर सकते हैं।

साइबर सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

भारत में डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना बेहद जरूरी हो गया है।

  • MuleHunter.ai जैसे AI टूल:
  • बैंकिंग सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बना सकते हैं
  • फर्जी ट्रांजैक्शन को जल्दी पकड़ सकते हैं
  • ग्राहकों के पैसे को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं

अगर इसे देशभर के बैंकों में प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो यह साइबर ठगी के खिलाफ एक मजबूत तकनीकी हथियार साबित हो सकता है।

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Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life.

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