UPI यूजर्स दें ध्यान! अगले हफ्ते से ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम में बड़ा बदलाव, PhonePe, Paytm, Google Pay सब पर असर

Updated on 26-Jul-2025
HIGHLIGHTS

NPCI ने UPI यूजर्स के लिए जारी किए नए दिशा-निर्देश

अकाउंट बैलेंस केवल 50 बार ही चेक कर सकेंगे यूजर्स

ऑटोपे ट्रांजैक्शन्स अब तय समय स्लॉट में ही होंगे प्रोसेस

भारत में डिजिटल पेमेंट की रीढ़ बन चुके UPI सिस्टम में अगस्त 2025 से कुछ अहम बदलाव होने जा रहे हैं. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ऐलान किया है कि 1 अगस्त 2025 से Unified Payment Interface (UPI) पर नए एपीआई (API) नियम लागू होंगे. इन नियमों के दायरे में सभी बैंक और पेमेंट ऐप्स आएंगे, जिनमें AutoPay और अकाउंट बैलेंस चेक जैसी सेवाओं पर नई सीमाएं तय की गई हैं.

रोजाना सिर्फ 50 बार ही चेक कर सकेंगे अकाउंट बैलेंस

नए नियमों के मुताबिक, UPI यूजर्स अब अपने बैंक अकाउंट का बैलेंस केवल 50 बार प्रतिदिन ही चेक कर सकेंगे. NPCI के अनुसार, यह बदलाव इसलिए लाया गया है ताकि UPI सिस्टम को अधिक भरोसेमंद, निर्बाध और तेज बनाया जा सके, खासकर उस समय जब ट्रैफिक सबसे ज्यादा होता है.

हालांकि, अधिकांश यूजर्स को इस बदलाव से कोई बड़ी दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जो यूजर्स दिन में कई बार बैलेंस चेक करते हैं या बार-बार पेमेंट स्टेटस अपडेट करते हैं, उन्हें यह बदलाव प्रभावित कर सकता है.

ऑटो-पे ट्रांजैक्शन्स के लिए अब तय होगा टाइम स्लॉट

NPCI ने UPI AutoPay फीचर को लेकर भी एक बड़ा अपडेट जारी किया है. अब से सभी ऑटोमेटेड पेमेंट्स जैसे कि सब्सक्रिप्शन, यूटिलिटी बिल्स, EMI को फिक्स्ड टाइम स्लॉट्स में प्रोसेस किया जाएगा. पहले ये ट्रांजैक्शन्स दिन में कभी भी हो सकते थे, लेकिन अब इनका प्रोसेसिंग टाइम निश्चित होगा.

इससे पेमेंट सिस्टम पर लोड कम होगा और ट्रांजैक्शन्स फेल होने की संभावना भी घटेगी. हालांकि यह एक बैकएंड बदलाव है, लेकिन इससे प्लेटफॉर्म की परफॉर्मेंस बेहतर होगी.

व्यवसायों को करनी होगी प्रक्रिया में हल्की फेरबदल

जो बिजनेस UPI के जरिए ऑटोमैटिक कलेक्शन पर निर्भर हैं, उन्हें अपनी प्रक्रिया में हल्के बदलाव करने पड़ सकते हैं. लेकिन आम यूजर्स के लिए यह बदलाव ज़्यादा प्रभाव नहीं डालेगा. वे अपने मोबाइल रिचार्ज, ओटीटी सब्सक्रिप्शन या बिल पेमेंट्स जैसी सेवाओं को पहले की तरह ही इस्तेमाल कर पाएंगे.

NPCI के ये बदलाव UPI प्लेटफॉर्म को और ज्यादा मजबूत और कुशल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं. इनका मुख्य उद्देश्य है सर्वर लोड को नियंत्रित करना और ट्रांजैक्शन फेल्योर की संख्या को कम करना. अगर आप एक नियमित UPI यूजर हैं, तो यह जरूरी है कि इन नए नियमों की जानकारी रखें और उसी अनुसार अपने ट्रांजैक्शन्स की प्लानिंग करें.

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Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं.

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