गर्मी के दिनों में अपने घर या ऑफिस को ठंडा रखने के लिए, पसीने और उमस से बचने के लिए रूम कूलर एक किफायती और प्रभावी तरीका होते हैं। लेकिन मार्केट में अलग-अलग प्रकार के कूलर और फीचर्स होते हैं, इसलिए सही कूलर चुनना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हम आपको 7 ऐसी महत्वपूर्ण बातें बताएंगे जिनका ध्यान रखकर आप अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सबसे बेहतर रूम कूलर चुन सकते हैं।
कूलर की क्षमता को CFM (cubic feet per minute) में मापा जाता है, जो बताता है कि वह कितना हवा सर्कुलेट कर सकता है। अपने कमरे की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई को मापकर उसका वॉल्यूम निकालें और उसे आधा करें। इससे आपको पता चलेगा कि आपके कमरे के लिए कितना CFM जरूरी है। बड़े कमरे के लिए ज्यादा CFM वाला कूलर चुनें।
कूलर में पानी की टंकी की क्षमता यह तय करती है कि कूलर कितनी देर तक बिना रिफिल के चलेगा। छोटे कमरे के लिए 15 से 30 लीटर की टंकी ठीक रहती है। मीडियम कमरे के लिए 30 से 60 लीटर की टंकी सही है, जबकि बड़े कमरे के लिए 60 लीटर या उससे ज्यादा की टंकी वाला कूलर बेहतर रहेगा। कुछ कूलरों में ऑटो-फिल फीचर भी मिलता है, जिससे पानी अपने आप भरता रहता है।
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कूलिंग पैड्स कूलिंग प्रक्रिया का अहम हिस्सा होते हैं। आम तौर पर दो तरह के पैड्स होते हैं:
कूलर की बिजली खपत वाट (Watt) में बताई जाती है। कूलर एयर कंडीशनर की तुलना में कम बिजली खर्च करते हैं। अगर आपके इलाके में बिजली कटौती अक्सर होती है, तो ऐसा कूलर चुनें जो इन्वर्टर के साथ काम कर सके। BLDC मोटर वाले मॉडल भी उपलब्ध हैं जो और भी कम बिजली लेते हैं।
कूलर की बॉडी आमतौर पर प्लास्टिक या मेटल का होती है। मजबूत बिल्ड वाला कूलर लंबे समय तक टिकता है। चलाने में आसानी के लिए कूलर में कास्टर व्हील होना अच्छा होता है, ताकि आप उसे आसानी से एक कमरे से दूसरे कमरे में ले जा सकें।
आजकल के कूलर कई स्मार्ट फीचर्स के साथ आते हैं: