क्या आपने कभी सोचा है कि जिस WhatsApp पर आप दिन-रात अपने दोस्तों और परिवार से जुड़े रहते हैं, उसे बनाने वाला शख्स कभी फर्श पर पोंछा लगाता था? यह कहानी किसी हॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है. यूक्रेन के एक बेहद गरीब परिवार से निकलकर अमेरिका में सरकारी ‘फूड स्टैम्प्स’ (Food Stamps) पर गुजारा करने वाले जन कूम (Jan Koum) ने ऐसा ऐप बनाया जिसने दुनिया के बातचीत करने का तरीका ही बदल दिया. गरीबी से अरबपति बनने और फिर उसूलों के लिए मार्क जुकरबर्ग (फेसबुक) से भिड़ जाने वाले जन कूम की यह कहानी आपको जरूर जाननी चाहिए.
Jan Koum की कहानी संघर्ष, धैर्य और स्पष्ट सोच की मिसाल है. यूक्रेन के एक साधारण परिवार से निकलकर दुनिया की सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप बनाने तक का सफर आसान नहीं था, बल्कि लगातार कठिनाइयों से भरा हुआ था.
1976 में कीव के पास जन्मे Koum ने अपना बचपन सोवियत शासन के दौरान बिताया. उस समय लोगों की निगरानी आम बात थी. यही वजह थी कि उनके मन में निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर गहरी सोच बनी, जो आगे चलकर उनके काम की सबसे बड़ी पहचान बनी.
16 साल की उम्र में वह अपनी मां के साथ United States चले गए और कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू में रहने लगे. वहां भी हालात आसान नहीं थे. परिवार को गुजारा करने के लिए सरकारी सहायता लेनी पड़ती थी और Koum खुद सफाई का काम करके घर चलाने में मदद करते थे. उनके पिता यूक्रेन में ही रह गए थे और बाद में उनका निधन हो गया.
इन मुश्किल हालात के बीच भी Koum ने तकनीक में अपनी रुचि बनाए रखी. उन्होंने खुद से प्रोग्रामिंग सीखी, किताबें उधार लेकर और लगातार अभ्यास करके अपनी समझ बढ़ाई. उन्होंने San Jose State University में दाखिला लिया, लेकिन कुछ समय बाद पढ़ाई छोड़कर काम करना शुरू कर दिया.
शुरुआत में उन्होंने Ernst & Young में काम किया, लेकिन असली बदलाव तब आया जब वह Yahoo से जुड़े. यहीं उनकी मुलाकात Brian Acton से हुई. दोनों ने साथ काम किया और आगे चलकर साथ ही एक नई शुरुआत करने का फैसला लिया.
2009 में Koum और Acton ने WhatsApp शुरू किया. उनका लक्ष्य साफ था, एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना जो सरल हो, विज्ञापनों से मुक्त हो और लोगों की निजी जानकारी की पूरी सुरक्षा करे. उस समय ज्यादातर कंपनियां यूजर्स के डेटा से कमाई करने पर ध्यान दे रही थीं, लेकिन WhatsApp ने अलग रास्ता चुना.
धीरे-धीरे WhatsApp ने लोगों के बीच अपनी जगह बना ली और यह दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मैसेजिंग सेवाओं में शामिल हो गया. 2014 में इस सफर ने बड़ा मोड़ लिया, जब Facebook ने WhatsApp को 19.3 अरब डॉलर में खरीद लिया. इस सौदे के बाद Koum अरबपति बन गए, लेकिन उनकी सोच में कोई बदलाव नहीं आया.
उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि WhatsApp में विज्ञापन न हों और यूजर्स का डेटा सुरक्षित रहे. यही वजह रही कि 2018 में उन्होंने Facebook छोड़ दिया क्योंकि कंपनी WhatsApp को अलग तरीके से कमाई का जरिया बनाना चाहती थी.
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