भारत में गर्मी का मौसम शुरू होते ही घरों में सबसे पहले जिस चीज़ की जरूरत महसूस होती है, वह है एयर कूलर। हर साल की तरह इस बार भी लोग नया कूलर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, लेकिन एक आम दुविधा सभी के सामने रहती है, वो यह कि हनीकॉम्ब पैड वाला कूलर बेहतर रहेगा या पारंपरिक घास वाला? दिखने में दोनों लगभग एक जैसे लग सकते हैं, मगर इनके काम करने का तरीका, ठंडक देने की क्षमता और मेंटेनेंस पूरी तरह अलग होते हैं। कई लोग सिर्फ कीमत देखकर खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती। इसलिए सही जानकारी के साथ फैसला लेना जरूरी है, ताकि पैसा भी सही जगह खर्च हो और गर्मी में राहत भी पूरी मिले। इस आर्टिकल में हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि हनीकॉम्ब और घास वाले कूलर में क्या फर्क है, और किसे खरीदने में फायदा है।
फायदे: हनीकॉम्ब पैड वाले कूलर इन दिनों काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाला पैड खास तरह के पेपर मटीरियल से बना होता है, जिसका स्ट्रक्चर मधुमक्खी के छत्ते जैसा होता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पानी को लंबे समय तक अपने अंदर बनाए रखता है। जब पानी ज्यादा समय तक टिकता है, तो उससे गुजरने वाली हवा ज्यादा ठंडी हो जाती है, जिससे बेहतर कूलिंग मिलती है। इसके अलावा, ये पैड जल्दी खराब नहीं होते और एक बार लगाने के बाद 2–3 साल तक आराम से चलते हैं। इन्हें साफ करना भी आसान होता है।
कमियां: हालांकि, इनकी कीमत सामान्य पैड की तुलना में थोड़ी ज्यादा होती है, और अगर आपके क्षेत्र में पानी ज्यादा खारा है तो ये जल्दी ब्लॉक भी हो सकते हैं।
फायदे: वहीं दूसरी ओर, घास वाले कूलर लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे हैं और आज भी कई घरों में देखने को मिल जाते हैं। इनमें लकड़ी के रेशों से बने पैड होते हैं, जो काफी सस्ते होते हैं और आसानी से उपलब्ध भी हो जाते हैं। इनकी खास बात यह है कि ये कम बजट में काम चलाने के लिए उपयुक्त होते हैं और खारे पानी में भी ठीक से काम कर लेते हैं।
कमियां: लेकिन इनके साथ कुछ समस्याएं भी जुड़ी होती हैं। हर साल पैड बदलना पड़ता है क्योंकि ये जल्दी खराब हो जाते हैं। ये पानी भी ज्यादा खपत करते हैं और कूलिंग उतनी प्रभावी नहीं होती। कई बार घास के छोटे टुकड़े पंप में फंसकर खराबी का कारण बन सकते हैं, और समय के साथ इनमें बदबू भी आने लगती है।
अगर बात करें कि किस विकल्प में ज्यादा बचत और बेहतर कूलिंग मिलेगी, तो यह आपके इस्तेमाल पर निर्भर करता है। अगर आप लंबे समय के लिए कूलर लेना चाहते हैं और बार-बार मेंटेनेंस से बचना चाहते हैं, तो हनीकॉम्ब पैड वाला कूलर ज्यादा फायदेमंद साबित होगा। हालांकि शुरुआत में थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, लेकिन लंबे समय में यह किफायती रहता है।
दूसरी तरफ, अगर आपका बजट कम है या कूलर का इस्तेमाल कम समय के लिए करना है, तो घास वाला कूलर भी पर्याप्त हो सकता है। बंद कमरे में बेहतर कूलिंग के लिए हनीकॉम्ब कूलर अच्छा विकल्प है, जबकि खुली जगह या बरामदे में घास वाला कूलर भी ठीक काम कर सकता है।
कूलर खरीदते समय केवल पैड के प्रकार पर ध्यान देना ही काफी नहीं है, बल्कि अपनी जरूरतों को समझना भी जरूरी है।
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