क्या आपके बच्चे तो नहीं खेल रहे ये 4 ‘खतरनाक’ गेम? गाजियाबाद की घटना के बाद हो जाएं सतर्क! अभी चेक कर लें फोन

Updated on 10-Feb-2026

गाजियाबाद की उस दिल दहला देने वाली घटना ने हर माता-पिता को मोबाइल ऐप और गेम्स को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है. तीन सगी बहनों की आत्महत्या के मामले में पुलिस को उनकी पर्सनल डायरी से कुछ ऐसे ‘Horror Games’ के नाम मिले हैं, जो बच्चों के कोमल मन पर गहरा और खतरनाक असर डाल रहे हैं. यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हर घर के लिए एक चेतावनी है.

डायरी ने खोला राज

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) की दुखद आत्महत्या के बाद जांचकर्ताओं ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. लड़कियों की पर्सनल डायरी में कुछ डरावने मोबाइल गेम्स (Horror-based mobile games) के बार-बार संदर्भ मिले हैं. अधिकारियों ने कहा कि ये गेम, जो बच्चों और किशोरों के बीच व्यापक रूप से लोकप्रिय हैं, में हॉरर, हिंसा और मनोवैज्ञानिक तीव्रता के तत्व हैं जो युवा दर्शकों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं.

4 खतरनाक गेम्स

Poppy Playtime: यह एक फर्स्ट-पर्सन हॉरर गेम है जहां खिलाड़ी एक वीरान खिलौना फैक्ट्री में घूमते हैं. इसमें ‘Huggy Wuggy’ जैसे भयानक खिलौने और अचानक डराने वाले दृश्य (Jump scares) हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका माहौल छोटे बच्चों के लिए बहुत डरावना है.

The Baby In Yellow: इसमें खिलाड़ी एक बेबीसिटर की भूमिका में होता है जो एक रहस्यमयी बच्चे की देखभाल करता है. डायपर बदलने जैसे सामान्य काम धीरे-धीरे पैरानॉर्मल (Paranormal) घटनाओं में बदल जाते हैं. मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि शिशु देखभाल को हॉरर थीम के साथ जोड़ना बच्चों में भ्रम और डर पैदा कर सकता है.

Evil Nun: Scary Horror Game: यह गेम एक स्कूल के माहौल में सेट है जहां एक डरावनी नन बच्चों को पकड़ती है. इसमें हिंसा और डरावने दृश्य हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल और अथॉरिटी को डरावने रूप में दिखाना बच्चों के दिमाग में चिंता (Anxiety) पैदा कर सकता है.

Ice Scream: कहानी एक आइसक्रीम वाले के इर्द-गिर्द घूमती है जो बच्चों का अपहरण करता है और उन्हें जमा देता है. हालांकि यह कार्टून जैसा दिखता है, लेकिन अपहरण की थीम बच्चों के मन में डर बैठा सकती है.

क्या हुआ था उस रात?

यह घटना 4 फरवरी की सुबह की है, जब तीनों बहनों ने कथित तौर पर अपनी इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी. जांचकर्ताओं ने कहा कि लड़कियां मोबाइल फोन पर लंबा समय बिता रही थीं और ऑनलाइन कंटेंट में डूबी हुई थीं. उनके पिता, चेतन कुमार, ने अत्यधिक स्क्रीन उपयोग और बच्चों के व्यवहार में बदलाव को देखते हुए उनके फोन छीन लिए थे और बेच दिए थे, जिससे वे गहरे भावनात्मक तनाव में थीं.

पुलिस को 8 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है. पुलिस डिजिटल आदतों, अलगाव और पारिवारिक तनाव सहित कई एंगल्स से जांच कर रही है. मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिना रोक-टोक के हॉरर कंटेंट और अत्यधिक स्क्रीन टाइम के गंभीर मनोवैज्ञानिक परिणाम हो सकते हैं.

चेतावनी: ऐसे गेम्स के लगातार संपर्क में आने से संवेदनशील बच्चे असल दुनिया से कट जाते हैं और काल्पनिक डरावनी दुनिया में जीने लगते हैं. शिक्षा अधिकारियों ने माता-पिता से आग्रह किया है कि वे इस बात पर कड़ी नज़र रखें कि उनके बच्चे कौन से गेम खेल रहे हैं.

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Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं.

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