दुकान पर समोसा खाया और पेमेंट करने के लिए फोन निकाला. दुकानदार ने कहा, “भैया, UPI कर दो.” आपने पूछा, “BHIM चलेगा?” और वो बोला, “हां, एक ही बात है.” हम अक्सर इन दोनों शब्दों को एक ही मान लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि BHIM और UPI दो अलग-अलग चीजें हैं? अगर आप भी इनमें कंफ्यूज होते हैं, तो आज हम बहुत आसान भाषा में यह गुत्थी सुलझाने वाले हैं.
सबसे पहले UPI (Unified Payments Interface) को समझते हैं. इसे आप एक ‘सिस्टम’ या ‘तकनीक’ मान सकते हैं. यह एक ऐसा डिजिटल रास्ता है जो आपके बैंक खाते को आपके स्मार्टफोन से जोड़ता है.
आसान और तेज: यह पुराने बैंक ट्रांसफर जैसा नहीं है जहाँ आपको अकाउंट नंबर और IFSC कोड डालना पड़ता था. इसमें सिर्फ एक ‘वर्चुअल आईडी’ (VPA) से काम चल जाता है.
24×7 सेवा: चाहे रात के 2 बजे हों या रविवार की छुट्टी, UPI से पैसा तुरंत इधर से उधर हो जाता है.
अब बात करते हैं BHIM (Bharat Interface for Money) की. यह एक मोबाइल ‘ऐप’ है. इसे 2016 में NPCI (जो भारत में डिजिटल पेमेंट संभालती है) ने लॉन्च किया था.
सरकारी ऐप: चूँकि इसे सरकार और NPCI ने बनाया है, इसलिए इसे बहुत सुरक्षित माना जाता है.
काम कैसे करता है: यह ऐप उसी UPI तकनीक का इस्तेमाल करता है जिसके बारे में हमने ऊपर बात की. यानी, BHIM वो ‘गाड़ी’ है जो UPI नाम की ‘सड़क’ पर चलती है.
इन दोनों के बीच का अंतर समझना बहुत आसान है:
इसे ऐसे समझें: जैसे आप Jio या Airtel (जो नेटवर्क है) का इस्तेमाल करके WhatsApp (जो ऐप है) चलाते हैं. यहाँ UPI नेटवर्क जैसा है और BHIM व्हाट्सऐप जैसा एक ऐप है. PhonePe, Google Pay और Paytm भी BHIM की तरह ही ऐप हैं, जो UPI सिस्टम का ही इस्तेमाल करते हैं.
आप एक ही फोन में कई सारे UPI ऐप्स (जैसे BHIM, Google Pay) रख सकते हैं. NPCI के नियमों के मुताबिक, आप UPI के जरिए एक बार में 1 लाख रुपये तक का ट्रांजेक्शन कर सकते हैं और BHIM ऐप भी इसी नियम का पालन करता है.
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