स्मार्टफोन हैकिंग के 5 आम तरीके, स्कैमर्स यूं नाक के नीचे से उड़ा लेते हैं बड़े-बड़ों का बैंक अकाउंट, आप बचकर रहें

Updated on 01-Jun-2025

स्मार्टफोन हैकिंग अक्सर हाई-टेक तकनीक जैसा लगता है, लेकिन असलियत में ज्यादातर साइबर हमले बेहद साधारण तरीकों से होते हैं। हैकर मुश्किल कोड या खतरनाक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कम ही करते हैं, वो हमारी रोज़मर्रा की आदतों और बर्ताव को निशाना बनाते हैं। उनका मकसद भरोसे, दिनचर्या और तुरंत रिएक्शन का फायदा उठाना होता है ताकि आपकी निजी जानकारी हासिल की जा सके।

यहां हम ऐसे 5 आम तरीकों की बात कर रहे हैं, जिनसे लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं और साइबर हमलों, स्कैम आदि का शिकार बन जाते हैं:

नकली QR कोड से पेमेंट स्कैम

आजकल QR कोड के ज़रिए पेमेंट करना आम हो गया है। स्कैमर्स असली QR कोड पर नकली स्टिकर चिपका देते हैं। जब आप स्कैन करके पेमेंट करते हैं, तो पैसा उनके खाते में चला जाता है। यह जाल इसलिए काम करता है क्योंकि पेमेंट प्रोसेस हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गई है, और हम बिना जांचे भुगतान कर देते हैं।

फ़र्ज़ी कॉल जो बैंक या सरकारी सहायता के नाम पर आते हैं

ऐसे कॉल्स में कॉलर खुद को बैंक या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताता है। वो बहुत प्रोफेशनल तरीके से बात करते हैं और आपके बारे में कुछ बुनियादी जानकारी भी बता देते हैं, जैसे नाम या मोबाइल नंबर के बारे में कोई डिटेल। कॉल में अक्सर डराने वाला माहौल बनाते हैं जैसे, “आपका खाता ब्लॉक हो सकता है,” या “संदिग्ध गतिविधि मिली है।” इनका मकसद डर नहीं, आपका जल्दी रिएक्शन लेना होता है, ताकि आप सोचे-समझे बिना जानकारी साझा कर दें।

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नकली डिलीवरी या बैंक से जुड़े मैसेज

आपको एक SMS या WhatsApp मैसेज मिलता है जिसमें लिखा होता है कि कोई पार्सल डिलीवरी मिस हो गई या बैंक वेरिफिकेशन अधूरा है। इसमें एक लिंक होता है जो असली जैसा दिखता है। अब क्योंकि लगभग हर किसी के पास कोई न कोई डिलीवरी या बैंक अकाउंट होता ही है, इसलिए यह जाल ज्यादातर लोगों पर काम करता है। SMS और WhatsApp जैसे निजी प्लेटफॉर्म्स से आए मैसेज ज्यादा भरोसेमंद लगते हैं, और यही इस धोखे की सबसे बड़ी ताकत है।

भरोसेमंद दिखने वाले खतरनाक ऐप्स

कई बार लोग फ़ाइल क्लीनर, फ्लैशलाइट या बैटरी सेविंग जैसे दिखने वाले ऐप डाउनलोड कर लेते हैं, जिनमें असल में मेलवेयर छुपे होते हैं। ये ऐप्स अक्सर प्ले स्टोर जैसे भरोसेमंद ऐप स्टोर्स में भी मिल जाते हैं, जिससे यूज़र्स बिना जांच-पड़ताल के इन्हें इंस्टॉल कर लेते हैं। एक बार इंस्टॉल होने पर ये आपकी लोकेशन, मैसेज और अन्य संवेदनशील जानकारी तक चुपचाप पहुंच बना लेते हैं।

सिम स्वैप हमला

इसमें हैकर मोबाइल कंपनी को झांसा देकर आपकी सिम का नया डुप्लिकेट निकलवा लेता है। वह इस तरह आपकी लीक हुई पर्सनल डिटेल्स का इस्तेमाल कर करता है। इसके बाद वह आपके कॉल, OTP और मैसेज रिसीव करने लगता है, और आपको पता भी नहीं चलता। आमतौर पर यूज़र को तब पता चलता है जब फोन में नेटवर्क आना बंद हो जाता है।

इन सभी ट्रिक्स का असर तकनीक से ज्यादा इंसान के व्यवहार पर निर्भर करता है। सतर्क रहना, कॉल्स और मैसेज की जांच करना, अनजाने ऐप्स से दूरी रखना और पेमेंट से पहले QR कोड की पुष्टि करना, यही आपके स्मार्टफोन और आपकी जेब की सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है।

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Faiza Parveen

फाईज़ा परवीन डिजिट हिंदी में एक कॉपी एडिटर हैं। वह 2023 से डिजिट में काम कर रही हैं और इससे पहले वह 6 महीने डिजिट में फ्रीलांसर जर्नलिस्ट के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, और उनके पसंदीदा तकनीकी विषयों में स्मार्टफोन, टेलिकॉम और ओटीटी शामिल हैं। उन्हें हमारे हिंदी पाठकों को वेब पर किसी डिवाइस या सेवा का उपयोग करने का तरीका सीखने में मदद करने के लिए लेख लिखने में आनंद आता है। सोशल मीडिया की दीवानी फाईज़ा को अक्सर अपने छोटे वीडियो की लत के कारण स्क्रॉलिंग करते हुए देखा जाता है। वह थ्रिलर फ्लिक्स देखना भी काफी पसंद करती हैं।

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