Best Movies of Vijay: पिछले कुछ महीनों से Thalapathy Vijay लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. आज चुनाव के रिजल्ट आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनकी ही हो रही है. उनकी पार्टी लगभग बहुमत के पास है और माना जा रहा है तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री Thalapathy Vijay ही बनेंगे.
ऐसे समय में विजय की वो फिल्में फिर से चर्चा में हैं, जिनमें उन्होंने सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि सिस्टम, राजनीति और समाज पर सीधा सवाल उठाया. विजय की खासियत यह रही है कि उन्होंने मेनस्ट्रीम सिनेमा के जरिए ऐसे मुद्दों को उठाया, जो आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं. उनकी कई फिल्मों में सरकार, भ्रष्टाचार, किसानों की स्थिति, स्वास्थ्य व्यवस्था और वोटिंग सिस्टम जैसे विषय साफ दिखाई देते हैं.
यह विजय की शुरुआती फिल्मों में से एक थी, जिसमें उन्होंने एक युवा वकील का किरदार निभाया. फिल्म में न्याय व्यवस्था की खामियों और भ्रष्टाचार को दिखाया गया. कहानी इस बात पर जोर देती है कि एक ईमानदार इंसान भी सिस्टम के खिलाफ खड़ा होकर बदलाव ला सकता है.
इस फिल्म में विजय एक आम इंसान से नेता बनने तक का सफर तय करते हैं. कहानी बताती है कि कैसे हालात एक व्यक्ति को राजनीति में धकेल देते हैं और फिर जिम्मेदारी और सत्ता के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल होता है.
A. R. Murugadoss द्वारा निर्देशित इस फिल्म में विजय ने डबल रोल निभाया. फिल्म किसानों की समस्याओं, जमीन अधिग्रहण और कॉर्पोरेट शोषण जैसे मुद्दों पर फोकस करती है. यह उन फिल्मों में से है जिसने ग्रामीण भारत की समस्याओं को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया.
इस फिल्म में विजय ने हेल्थकेयर सिस्टम पर सीधा सवाल उठाया. कहानी में मेडिकल भ्रष्टाचार और महंगे इलाज की समस्या को दिखाया गया. फिल्म के कुछ डायलॉग्स टैक्स और पब्लिक हेल्थ को लेकर काफी चर्चा में रहे थे.
यह विजय की सबसे ज्यादा राजनीतिक फिल्मों में से एक मानी जाती है. इसमें वह एक NRI बिजनेसमैन का रोल निभाते हैं, जो वोट डालने भारत आता है लेकिन पता चलता है कि उसका वोट पहले ही डाला जा चुका है. इसके बाद वह चुनावी गड़बड़ियों और सिस्टम के खिलाफ लड़ाई शुरू करता है.
हालांकि यह एक स्पोर्ट्स ड्रामा है, लेकिन इसमें महिला सशक्तिकरण और जेंडर इक्वालिटी का मजबूत मैसेज दिया गया है. फिल्म दिखाती है कि महिलाओं को खेल और समाज दोनों जगह किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
Vijay की फिल्में सिर्फ बॉक्स ऑफिस हिट्स नहीं हैं. उन्होंने बार-बार यह दिखाया है कि कमर्शियल सिनेमा के अंदर भी बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया जा सकता है. यही वजह है कि उनकी फिल्मों का असर थिएटर के बाहर भी दिखाई देता है.
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