OTT पर उपलब्ध 8 साउथ इंडियन थ्रिलर फिल्में जो सस्पेंस, ट्विस्ट और दमदार कहानी के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। यहाँ हम आपको इन साउथ मूवीज के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने वाले हैं, लिस्ट में Drishyam, Thani Oruvan, Lucia और अन्य फिल्में शामिल हैं। सस्पेंस तब असरदार हो जाता है, जब कहानी सिर्फ चौंकाती नहीं, बल्कि बेचैन भी करती है। कभी एक ‘एक्सीडेंट’ पूरी ज़िंदगी बदल देता है, कभी एक पुरानी फाइल में दबी सच्चाई सामने आती है, तो कभी अपराध और नैतिकता की रेखा धुंधली हो जाती है। ये आठ साउथ इंडियन थ्रिलर फिल्में ठीक वही करती है। धीरे-धीरे कहानी बुनती हैं, फिर अचानक ज़मीन खींच लेती हैं। आइए अब इन सभी साउथ इंडियन फिल्मों और वेब सीरीज आदि के बारे में विस्तार से जानते हैं।
एक साधारण केबल टीवी ऑपरेटर जॉर्जकुट्टी, अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए एक ऐसा प्लान निर्मित करता है, जिसकी बारीकी फिल्म को देखकर आपका भी दिमाग हिला देने वाली हैं, इस प्लान की बारीकी ऐसी हैं कि आपका दिमाग घूम ही जाता है। असल में, परिवार की रक्षा के लिए ऐसा प्लान बनाता है जिसकी बारीकियाँ फिल्म देखने वालों का भी दिमाग घुमा देती हैं। यह मलयालम सिनेमा की सबसे प्रभावशाली क्राइम थ्रिलर में गिनी जाती है।
इस कहानी में आईईपीएस अधिकारी मिथ्रन का सामना होता है सिद्धार्थ अभिमन्यु से, यह एक तेज दिमाग लेकिन भ्रष्ट वैज्ञानिक-व्यवसायी है। मेडिकल माफिया से जुड़ी परतें खुलती हैं और कहानी बिल्ली-चूहे के खेल में बदल जाती है। यह थ्रिलर स्टाइल और दिमागी मुकाबले दोनों के लिए जानी जाती है।
रिटायर्ड अफसर अप्पू पिल्लई, जिनकी याददाश्त कमजोर हो रही है, तब मुश्किल में फंस जाते हैं जब चुनाव से ठीक पहले उनकी लाइसेंसी बंदूक गायब हो जाती है। इसके बाद बेटे के लापता बच्चे से जुड़ी रहस्यमयी सच्चाइयाँ सामने आती हैं और कहानी धीरे-धीरे एक डार्क थ्रिलर में बदल जाती है।
एक निर्माण स्थल पर मिले कंकाल से 40 साल पुराना मामला फिर एक बार खुलता है। सब-इंस्पेक्टर के.एस. श्याम एक रिटायर्ड डिटेक्टिव के साथ मिलकर हत्या, खजाने और भ्रष्टाचार की गुत्थी सुलझाते हैं। फिल्म की स्पीड को भी औसत कहा जा सकता है, ऐसा भी कह सकते है कि यह उम्मीद से कम चलती है। इसी स्पीड के कारण आप पहले सीन से आखिरी सीन तक इस स्थिति में फंसे रहते हैं और टीवी स्क्रीन से एक पल के लिए भी नजर नहीं हटा पाते हैं।।
बेंगलुरु के एक फ्लाईओवर पर होने वाली रहस्यमयी दुर्घटनाएँ एक युवा पत्रकार रचना को जांच के लिए मजबूर करती हैं। जैसे-जैसे वह सच्चाई के करीब पहुँचती है, कहानी अलौकिक मोड़ ले लेती है। यह थ्रिलर सामाजिक टिप्पणी और हॉरर का मिश्रण पेश करती है।
मीरा एक डीएसपी की हत्या कर देती है और आत्मरक्षा का दावा करती है। जांच करते हुए सब-इंस्पेक्टर विक्रम वासुदेव ऐसे रहस्यों का पर्दाफाश करता है जो कहानी को अप्रत्याशित दिशा में ले जाते हैं। व्यभिचार, छिपी पहचान और गुमशुदगी का मामला इसे सशक्त सस्पेंस थ्रिलर बनाता है।
नींद ना आने की समस्या से जूझ रहा निक्की ‘लूसिया’ नाम की गोलियाँ लेता है, जो उसे सपनों में दूसरी जिंदगी जीने देती हैं। इस फिल्म के क्लाइमैक्स को देखकर आप अपनी कुर्सी से चिपक ही जाने वाले हैं। यह फिल्म मनोवैज्ञानिक थ्रिलर की श्रेणी में अलग पहचान रखती है।
कॉन्स्टेबल गिरी शंकर अपमान का बदला लेने की ठानता है और जांच करते-करते रहस्यमयी मौतों की कड़ी तक पहुँच जाता है। चालाकी से वह एक ऐसे कातिल का पीछा करता है जो सामने होते हुए भी दिखता नहीं। यह फिल्म नैतिक दुविधा और अपराध की मानसिकता को गहराई से दिखाती है।
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