Table of Content
  • 1.1 डिजिट रेटिंग
  • 1.2 Pros & Cons
  • 1.3 हमारा फैसला
  • 1.4 डिटेल रिव्यू
    • 1.5 चर्चित तुलना
    • 1.6 हाल में किए गए सवाल
    • 1.7 टिप्पणियां
    • 1.8 सर्वाधिक लोकप्रिय
    • 1.9 नवीनतम रिव्यू
    • 1.10 चर्चित तुलना
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    गूगल Pixel XL2 Review

    By Prasid Banerjee | 14 Nov 2017

    खूबियां

    अच्छा कैमरास्मूथ और फ्लूड परफॉरमेंस

    खामियां

    कैमरा अनुचित हैअंडरसैचुरेटेड डिस्प्ले, पुअर व्यू एंगल्सज़रूरत से ज़्यादा फॉर्म फैक्टर

    हमारा फैसला

    हाँ, गूगल पिक्सल 2 XL में एक क्लास-लीडिंग कैमरा मौजूद है लेकिन यह अनुचित भी है. सब-पार डिस्प्ले के साथ कुल मिलाकर इसका एक्सपीरियंस निराशाजनक है और हम पिक्सल 2 XL का सुझाव नहीं देंगें. 

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    गूगल Pixel XL2: डिटेल रिव्यू

    गूगल की मोबाइल हार्डवेयर की यह खोज खासतौर से सॉफ्टवेयर, AI और मशीन लर्निंग पर निर्भर करती है. यह हाई एंड मोबाइल हार्डवेयर है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग द्वारा काम करता है. लेकिन क्या यह विश्व और खासतौर से भारत इस तरह के डिवाइस के लिए तैयार है?

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    इससे ज़रूरी बात, क्या फंक्शनल सॉफ्टवेयर सोल्यूशन उपलब्ध करवाने के लिए गूगल ने हार्डवेयर के मामले में लापरवाही दिखा दी? कुल मिलाकर, पिक्सल 2 XL पिछले साल के पिक्सल की तरह ही है. कहा जाए तो गूगल पिक्सल 2 XL मौजूदा मोबाइल फोंस के हिसाब से बेस्ट हार्डवेयर ऑफर करता है और अपने सॉफ्टवेयर के साथ इसे बढ़ाना चाहता है. कंपनी का लक्ष्य है कि यूज़र्स को बेस्ट मोबाइल एक्सपीरियंस करवाया जाए. और यह कई तरह से काम भी करता है, लेकिन अगर मैं ईमानदारी से कहूँ तो मेरे लिए पिक्सल 2 XL एक टीवी शो की तरह है जिसे मेरे दोस्तों ने मुझसे पहले देखा और मुझे कई अवास्तविक उम्मीदें दीं. मैं यह ज़रूर कहूँगा कि कहीं न कहीं मैं इस डिवाइस से खुश नहीं हूँ और पिछले साल की तरह मुझे गूगल के कुछ फैसले पसंद नहीं आए हैं. मैं बताता हूँ कैसे.  

    हम नोट किए गए इशू से शुरुआत करते हैं

    मेरे जितने भी दोस्त पिक्सल 2 XL को खरीदना चाहते थे, उन सभी ने मुझसे इसके स्क्रीन बर्न-इन इशू के बारे में पुछा. इस रिव्यू यूनिट में मुझे अभी कोई ऐसी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है. गूगल ने इस इशू को स्वीकार किया है और कहा है कि जल्द ही यूज़र्स को इस समस्या से निजात मिलेगी. अगर पिक्सल 2 XL में बर्न-इन और इमेज रिटेंशन की समस्या आ रही है तो मैं आपको यह फोन न खरीदने के लिए ब्लेम नहीं करूँगा. 

    मेरे लिए, मेरी बढ़ी समस्या यह है कि किस तरह इसके रंग स्क्रीन पर दिखाई देते हैं. गूगल का कहना है कि इस परेशानी को खत्म करने के लिए कंपनी सॉफ्टवेयर पर काम कर रही है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह फोन पूर व्यू एंगल्स के साथ मदद कर रहा है. 2017 में आए सभी स्मार्टफोन चाहे फ्लैगशिप हो या नहीं लेकिन इनके एंगल्स पर नीला कलर नहीं देखने को मिलता है, खासकर जब ये तीव्र एंगल्स में न हों. ऐसा नहीं है कि सभी फोंस में अच्छे व्यू एंगल्स मौजूद हों लेकिन आप फ्लैगशिप डिवाइसेज़ में तो इस बात से आश्वस्त रहते हैं.  

    मुझे रात की रोशनी में इस समस्या के लिए एक अस्थाई सुझाव मिला है. आप नाईट लाइट ऑन कर सकते हैं (जो आपके फोन में ब्लू लाइट फ़िल्टर है) और इसकी इंटेंसिटी को कम कर दें. इससे जब आप फ्रंट से देखेंगे तो इसकी डिस्प्ले पीले रंग की दिखेगी, लेकिन एंगल्स से यह सफ़ेद लगेगी. 

    कंपनी का कहना है कि पिक्सल 2 XL की P-OLED डिस्प्ले sRGB+10% गेमुट के लिए ट्यून की गई है. क्योंकि जब तक ओरियो नहीं आता है एंड्राइड केवल sRGB सपोर्ट कर सकता है. लेकिन पिक्सल 2 XL हमेशा से एंड्राइड ओरियो के साथ आने वाला पहला फोन होना था, तो इस हिसाब से यह विवरण मेरे लिए काफी नहीं है. सच यह है कि Samsung, Apple, Sony, Xiaomi और लगभग सभी एंड्राइड स्मार्टफोन निर्माता बेहतर दिखने वाली डिस्प्ले बना रहे हैं. गूगल को ऐसा करने से क्या रोक रहा है?

    इसके अलावा, 2017 में डिस्प्ले को sRGB के लिए ट्यून करना पुराना तरीका है. DCI-P3 कलर गेमुट नया नहीं है.

    यह आपके लिए कैसे हो सकता है?

    जैसे कि ऊपर कही गई सभी बातें सच हैं, साथ ही यह भी सच है कि sRGB और DCI-P3 रेगुलर ग्राहकों के लिए कोई तर्क नहीं देते हैं. पिक्सल 2 XL की डिस्प्ले वार्म और सनी होने के बजाए धुंधली प्रतीत होती है. इस सब के बारे में यही महसूस किया जाता है कि न तो यह नेचुरल है और न ही इसे इस्तेमाल करके किसी तरह का सुख महसूस होता है. अगर आप नेचुरल चाहते हैं तो मैं आपको एप्पल द्वारा इस्तेमाल किए गए टोंस के बारे में सुझाव दूँगा, हालाँकि आईफोन निर्माता ने पिछले दो आईफोंस के साथ थोड़ी वार्म टोंस का इस्तेमाल किया है. इसका एक मतलब यह भी निकलता है कि आप नहीं जान पाएँगें कि इस डिवाइस द्वारा ली गई तस्वीरें असल में कैसी दिखाई देती हैं क्योंकि इन्हें आप इस डिस्प्ले में देख रहे होंगें. जो लोग स्नेपसीड, लाइटरूम या ऐसे कोई अन्य ऐप्स इस्तेमाल करने की आदत है तो वो इस स्क्रीन पर पिक्चर एडिटिंग करने का मज़ा नहीं ले सकते हैं. 

    अगर आप डिस्प्ले के ऊपर के फ्रंट पर देखते हैं तो यह नीला कलर इतना नहीं मैटर करेगा. लेकिन अगर आप बेड पर लेट कर अपने दोस्तों के साथ वीडियो देखने की कोशिश करते हैं तो इसके कलर्स का इशू देखने को मिलता है. मेरी निजी राय के हिसाब से पिक्सल 2 XL में क्रिस्प और वाइब्रेंट स्क्रीन मौजूद नहीं है. 

    बिल्ड और डिज़ाइन

    मैं भी पिक्सल 2 XL के मोटे बेज़ेल्स का बड़ा फैन नहीं हूँ. इस डिवाइस में 18:9 की डिस्प्ले मौजूद है और यह बिना ज़रूरत के बहुत बड़ी है जिसकी वजह से पिक्सल 2 XL को इस्तेमाल करना मुश्किल है. चूँकि ज्यादातर वीडियो/मूवीज़ 18:9 सपोर्ट नहीं करती हैं, यह पहले से ही पिलरबॉक्स्ड है लेकिन पिक्सल 2 XL के मोटे बेज़ेल्स ऐसे दिखते हैं जैसे यह भी पिलरबॉक्स्ड है. मैंने इसे डिस्ट्रेक्ट पाया और ऐसा लगता है जैसे यह यह पूरी स्क्रीन रियर एस्टेट को रेड्यूस करता है. 

    पिक्सल 2 XL एक अच्छी बनावट वाला स्मार्टफोन है. इसकी एल्युमीनियम केसिंग मज़बूत है. इसकी स्क्रीन चारों तरफ घट जाती है जो कि एक अच्छा स्पर्श है. इसका बैक एल्युमीनियम का है लेकिन इसके एक तिहाई हिस्से पर प्लास्टिक जैसा टेक्सचर फिनिश दिया गया है. इसका चौथाई हिस्सा ग्लास का है जो इम्प्रूव्ड ऐन्टेना परफॉरमेंस के लिए है, जहाँ एक कैमरा मोड्यूल मौजूद है. इसके निचे एक फिंगरप्रिंट सेंसर मौजूद है. मैं यह भी बताना चाहूँगा कि पिक्सल इंप्रिंट पिछले साल की तरह ही तेज़ है.  

    पिक्सल 2 XL के फॉर्म फैक्टर की वजह से आपको इसके पॉवर बटन पर जाने के लिए अपनी ग्रिप को शिफ्ट करना पड़ेगा. वोल्युम रॉकर आपके अंगूठे के अन्दर ही रहेंगें, लेकिन पॉवर बटन टॉप के पास रखा गया ह ई. फोन का सिम स्लॉट बायीं तरफ है और USB टाइप-C पोर्ट निचले हिस्से में मौजूद है. गूगल ने इस बार हेडफोन जैक को शामिल नहीं किया है और साथ ही बॉक्स में बंडल हेडफोंस भी शामिल नहीं है. यह एक फोन का निश्चित फेल है जिसकी कीमत Rs. 70,000 से ऊपर हो. हालाँकि, आपको बॉक्स के अंदर टाइप-C से 3.5mm डोंगल मिलता है. 

    आप यहाँ गूगल के डिज़ाइन फिलोसोफी के बारे में बहस कर सकते हैं लेकिन पिक्सल 2 XL कुछ तरीकों में युनीक भी है. मेरा ब्लैक रिव्यू यूनिट सभी अन्य प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले में पीछे लगता है लेकिन दिन के आखिर में देखा जाए तो यह अब भी फंक्शनल है. 

    कैमरा

    गूगल ने असल में पिक्सल 2 और पिक्सल 2 XL को एक जैसा फील देने की कोशिश की है. दोनों ही फोंस में समान कैमरे हैं. इसके बैक पर मौजूद 12MP सेंसर गूगल के AI और मशीन लर्निंग मम्बो जम्बो के साथ एक प्रभावी शूटर बनाता है. मैं इसे अलग-अलग हिस्सों में बाँटने वाला हूँ, क्योंकि पिक्सल 2/XL में अच्छे कैमरे मौजूद हैं लेकिन मैं मौजूदा दौर में इसे बेस्ट स्मार्टफोन कैमरा नहीं मानता. 

    पिक्सल कैमरा

    ऑफसेट पर, यह मेंशन करना ज़रूरी है कि पिक्सल का कैमरा ख़ास है. पिक्सल 2 का कैमरा कम्पेटरिओट्स से बेहतर क्यों है? ऐसा तस्वीरों में प्रोड्यूस हुई डिटेल्स की वजह से है. ये तस्वीरें इस फोन की डिस्प्ले में डल दिखती हैं लेकिन इस डिस्प्ले के अलावा इन्हें देखा जाए तो आप इन्हें पसंद करेंगें. मैंने आईफोन X और पिक्सल 2 XL से कुछ शॉट्स लिए थे, मैं पूरे यकीन से कह सकता हूँ कि डिटेल्स के मामले में गूगल का कैमरा ज़्यादा बेहतर है और जल्द ही हम इन दोनों डिवाइसेज़ के बीच तुलना करेंगें. 

    The Pixel 2 XL can capture amazing details in photos

    जब आप ज़ूम इन करते हैं तो इसमें कुछ महीन नोइज़ पाएँगें. यह इस स्टेट में कुछ हिस्सों पर सॉफ्ट महसूस हो सकता है लेकिन यह कोई प्रैक्टिकल यूज़-केस नहीं है और गूगल भी यह जानता है.

    क्यों नहीं?

    क्योंकि पिक्सल 2 का कैमरा चूज़ी है. इस डिवाइस में गैलेक्सी नोट 8 से ज़्यादा बेहतर है लेकिन मैं सैमसंग द्वारा दिए जा रहे कैमरे के साथ ज़्यादा कम्फ़र्टेबल हूँ. मैं जानता हूँ कि इसके परिणाम क्या होंगे और मैं क्या उम्मीद कर सकता हूँ. पिक्सल 2 XL में मौजूदा समय के स्मार्टफोन के हिसाब से या तो आपको बेस्ट तस्वीरें मिलती हैं या फिर एक हाई रेटेड स्मार्टफोन कैमरा के हिसाब से देखें तो यह एक औसत शॉट ही देता है. 

    पिक्सल 2 XL में मैंने जितनी तस्वीरें ली हैं उनमें से ज़्यादातर में वाइट बैलेंस बिगड़ा हुआ ही लग रहा है. अपरंपरागत स्थिति में, जैसे होटल्स में हलोजन लाइट्स आदि में पिक्सल 2 नोइज़ का अननेचुरली हाई लेवल प्रोड्यूस करता है. जैसे निचे दिखाई गई पियानो की तस्वीर हलोजन लाइट्स में ली गई है, पिक्सल 2 XL यहाँ बहुत ज़्यादा नोइज़ प्रोड्यूस करता है. इसी तरह दूसरी तस्वीर में, पेड़ों के बीच में यह नीली रोशनी प्रोड्यूस करता है, जबकि ओरिजिनल सीन में केवल रेगुलर फ्लुरोसेंट स्ट्रीट लैंप की ही रोशनी थी. 

    यह ध्यान देने योग्य है कि हमने दोनों डिवाइसेज़ पिक्सल 2 XL और पिक्सल 2  से तस्वीरें लीं, जिसका मतलब है ये इशू केवल एक यूनिट तक ही सीमित नहीं है. 

    पोर्ट्रेट मॉड

    Google ने पिक्सल 2 XL में मौजूद पोर्ट्रेट मॉड के साथ सही वचन निभाया है. इस फोन के बैक और फ्रंट पर सिंगल सेंसर मौजूद है, लेकिन साथ ही इसमें पोर्ट्रेट मॉड भी शामिल किया गया है. सच यह है कि गूगल इसे पूरा कर सकता था और मैं ज़रूर इसकी सराहना भी करता हूँ. मैं आपको यह भी बताना चाहूँगा कि इस डिवाइस में आपको आईफोन या नोट 8 के समान बोकेह नहीं मिलेगा. 

    Rear camera portrait shots (above and below)

    Front camera portrait

    पूरी तरह से सॉफ्टवेयर पर निर्भर होने के नाते पिक्सल 2 फोंस ज़्यादातर बैकग्राउंड पर ब्लर करते हैं. कभी-कभी आपको तस्वीरों में पैचेज देखने को मिलेंगें जो कि पूरी तरह से ब्लर नहीं है और कभी-कभी यह अननेचुरल तरीके से सब्जेक्ट को शार्प कर देता है. गूगल का पोर्ट्रेट मॉड न ही बहुत आकर्षक है और न ही निराशाजनक. 

    वीडियो 

    जो यूज़र्स यूट्यूब का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं या बहुत वीडियोज़ शूट करते हैं वह इसे काफी पसंद करेंगें. यह फोन पिछले साल के पिक्सल की तरह प्रभावी स्टेबिलाइजेशन ऑफर करता है. मैंने ट्रेन में सफर के दौरान वीडियो शूट की थी और जब मैंने बाद में इसे देखा तो यह बिलकुल स्टेबल थी. पिक्सल 2 XL सब्जेक्ट्स पर तेज़ी से फोकस शिफ्ट करता है, जो वीडियो शूट करने के लिए इसे एक आइडियल फोन बनाता है. 

    गूगल लेंस

    यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत के पिक्सल 2 और पिक्सल 2 XL वर्जन में गूगल लेंस मौजूद नहीं है. अभी तक गूगल ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि भारत में गूगल लेंस कब आ रहा है.  

    कुल मिलाकर 

    पिक्सल 2 के कैमरे के लिए DXOMark की 98 रेटिंग के बारे में बहुत कुछ कहा गया है. निजी तौर से, मैं कभी भी केवल DXOMark की रेटिंग पर निर्भर नहीं रहा. मैंने शुरुआत में जैसा कहा था कि पिक्सल 2 XL में एक बेहतरीन कैमरा है, लेकिन मैं आपको यह भी कह रहा हूँ कि आप हर बार इस कैमरे से बेहतरीन शॉट्स की उम्मीद नहीं कर सकते. मेरे हिसाब से यह एक डिपेंडेबल कैमरा नहीं है. 

    परफॉरमेंस

    यह सच है कि एंड्राइड फोंस समय के साथ धीमे पड़ जाते हैं. आप यकीन करें या न करें पिक्सल 2 XL भी धीमा पड़ जाएगा. लेकिन यह एक तेज़ फोन है. इसमें मौजूद स्नैपड्रैगन 835 एक तेज़ प्रोसेसर है. यह फोन 2017 की आईफोंस से ज़्यादा पॉवरफुल नहीं है. 

    रेगुलर यूसेज में पिक्सल 2 XL काफी स्मूथ और तेज़ है. लेकिन जितनी गूगल से उम्मीद की जा रही थी पिक्सल 2 XL उतना स्मूथ और तेज़ नहीं है. और इस बात का फर्क केवल मेरे जैसे निटपिकर्स को ही होगा. 

    अगर आप एक तेज़ एंड्राइड फोन खरीदना चाह रहे हैं तो  निश्चित रूप से पिक्सल 2 XL एक तेज़ फोन है. इस डिवाइस में कोई हीटिंग इशू नहीं है, हाँ अगर आप एक ही समय में कई काम करते हुए कई ऐप्स डाउनलोड कर रहे हैं तो यह गर्म हो सकता है. पिक्सल 2 XL एक तेज़ एंड्राइड फोन है. अगर कोई मुझसे पूछता है कि क्या इसे और तेज़ होने की ज़रूरत है तो मेरा जवाब हाँ है.

    बैटरी

    गूगल इस फोन के साथ एक दिन की बैटरी लाइफ ऑफर करता है, मैं भी इससे सहमत हूँ. हालाँकि, मुझे गैलेक्सी नोट 8 में ज़्यादा बैटरी लाइफ मिलती है. एक व्यस्त दिन में 15 मिनट के फेसबुक लाइव, 7 फोन कॉल्स, 20 मिनट लाइव ट्वीटिंग, दो 1080p शोर्ट वीडियो शूट और 40 मिनट के म्यूज़िक सुनने के दौरान यह बैटरी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चली. 

    पिक्सल 2 XL को आपको हर रोज़ शाम में एक बार चार्ज करना पड़ेगा. 

    नाओ प्लेयिंग

    पिक्सल 2 में गूगल असिस्टेंट आपको यह बताता है कि आपके आस-पास कोन से गाने चल रहे हैं. 

    नाओ प्लेयिंग काफी हद तक सही जानकारी देता है. मैंने इसे अस्पष्ट गानों के साथ भी टेस्ट कर के देखा है और इसने कई अस्पष्ट गानों को भी पहचान लिया था. 

    एक्टिव एज

    गूगल ने HTC की टीम के साथ मिलकर पिक्सल 2 और पिक्सल 2 XL में एज-स्क़ुईज़ का फीचर शामिल किया है. इस फीचर में एजेज़ को स्क़ुईज़ करके गूगल असिस्टेंट को लॉन्च कर सकते हैं. 

    इसके अलावा, पिक्सल 2 XL का वाइड फॉर्म फैक्टर स्क़ुईज़ करने में असुविधाजनक है. पिक्सल 2 में इस फीचर को इस्तेमाल करना आसान है. 

    आखिर में, इस इंटेंसिटी को सेट करने के लिए आपको ये स्टेप्स फॉलो करने होंगें, सेटिंग्स->ऐप्स एंड नोटिफिकेशंस->डिफ़ॉल्ट ऐप्स->असिस्ट एंड वोइस इनपुट->एक्टिव एज. आप मल्टीप्ल टेप्स को हटाने के लिए सेटिंग्स में सर्च बार का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. 

    क्या आपको पिक्सल 2 XL खरीदना चाहिए?

    पिक्सल 2 XL तेज़ है लेकिन बहुत तेज़ नहीं है, इस डिवाइस की डिस्प्ले आपको निराश करेगी, एक अच्छा कैमरा है लेकिन वो हमेशा अच्छी परफॉरमेंस नहीं देता है और साथ ही यह एवरेज बैटरी लाइफ ऑफर करता है. Rs. 73,000 की कीमत में यह एक बहुत अच्छा फोन नहीं है. बेशक यह एक फंक्शनल और अच्छा स्मार्टफोन है लेकिन मुझे नहीं लगता कि इस कीमत में यह एक बेस्ट स्मार्टफोन है. आपक पिक्सल 2 XL को एक अच्छे कैमरे की वजह से खरीद सकते हैं, लेकिन निजी रूप से मैं इससे खुश नहीं हूँ. 

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    Prasid Banerjee
    Trying to explain technology to my parents. Failing miserably.
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    हाल में किए गए सवाल
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    Bijay Kumar
    Oct 24, 2017
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